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Nainital News: साफिया मलिक की जमानत अर्जी खारिज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2024 05:27 AM IST
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Safia Malik's bail application rejected
हल्द्वानी। बनभूलपुरा स्थित कंपनी बाग की नजूल भूमि पर कब्जा कर स्टांप पेपर में बेचने और मृत व्यक्तियों के नाम से फर्जीवाड़ा करने की आरोपी साफिया मलिक की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ और फरार होने की आशंका जमानत नहीं मिलने की वजह बनी।
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सहायक नगर आयुक्त गणेश भट्ट की ओर से बनभूलपुरा हिंसा के बाद बीती 22 फरवरी को अब्दुल मलिक, उसकी पत्नी साफिया मलिक, अख्तरी बेगम, नबी रजा खां, गौस रजा खां और अब्दुल लतीफ के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। सभी पर कंपनी बाग वर्तमान में मलिक का बगीचा स्थित जमीन पर मरे हुए लोगों के दस्तावेज लगाकर फर्जी तरीके से कब्जा करने, कोर्ट में मरे व्यक्ति के नाम से हाईकोर्ट में रिट डालने और उसे खुर्द-बुर्द करने का आरोप है। इस बीच साफिया मलिक के वकील ने प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।
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दरअसल असल साल 2006-2007 में नगर निगम में साफिया मलिक की ओर से वनभूलपुरा कंपनी बाग भूखंड को फ्री-होल्ड कराने की अर्जी दी गई थी। साफिया मलिक के मुताबिक यह जमीन उन्हें 1994 में नबी रजा खां से हिबा में मिली थी जबकि नबी रजा की मौत साल 1988 में ही हो चुकी थी। इसके बाद लगातार नगर निगम को भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किए जाने और अवैध प्लाटिंग किए जाने की शिकायतें मिल रहीं थी। वहीं आरोपियों की ओर से मृतक नबी रजा के नाम पर अदालतों में पैरवी की जा रही थी। वहीं जमानत प्रार्थना पत्र के निस्तारण के दौरान यह कहा गया कि अब्दुल हनीफ खान को कोई हिबा (दाननामा) नहीं हुआ था, बल्कि अख्तरी बेगम और नबी रजा खान ने केवल देखरेख के लिए अब्दुल हनीफ खान को कहा था। मामले की जांच के दौरान पता चला कि विवादित भूखंड के गूगल इमेज भी लिए गए थे। 2011 में गूगल से ली गई अलग-अलग तस्वीरों से पता चला किया कैसे जमीन से पेड़-पौंधे कम होने शुरू हो गए और यहां पर धीरे-धीरे अवैध निर्माण शुरू हो गया था। साथ ही नजूल भूमि को स्टांप पेपर के जरिए लोगों को बेच दिया गया। तत्कालीन नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने अपने दस्तावेजी साक्ष्यों को मजबूती से तैयार किया था। प्रशासन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एडीजीसी डीएस मेहरा ने पर्याप्त साक्ष्यों की मौजूदगी के आधार पर मजबूत पैरवी की और आरोपी के जमानत पर छूटने के बाद साक्ष्यों में छेड़छाड़ और फरार होने की आशंका जाहिर की। साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमनिंदर सिंह की कोर्ट ने साफिया मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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