फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Russia St. Petersburg University has sought help from Pant University in cloning a white tiger

UK NEWS: अब लैब में सुनाई देगी सफेद बाघ की गर्जना, भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वीकारी चुनौती; रूस ने मांगी मदद

Sat, 20 Sep 2025 10:27 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 20 Sep 2025 10:27 AM IST
सार

रूस की सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी दुर्लभ सफेद बाघ का क्लोन बनाने के एक मिशन पर काम कर रही है। इसके लिए उसने उत्तराखंड स्थित जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से सहयोग मांगा है।

विज्ञापन
Russia St. Petersburg University has sought help from Pant University in cloning a white tiger
सफेद बाघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्लभ सफेद बाघ की गर्जना अब प्रयोगशाला से गूंजेगी। रूस की सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी दुनिया के सबसे रहस्यमयी और विलुप्तप्राय जीव सफेद बाघ का क्लोन बनाने जा रही है। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से सहयोग मांगा है। अच्छी खबर यह है कि पंत विवि ने इस चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक मिशन में सहयोग की हामी भर दी है। विवि के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि इसी साल फरवरी में रूस के वैज्ञानिकों और छात्रों का एक दल पंतनगर आया था। यहां सफेद बाघ की क्लोनिंग पर विस्तार से विमर्श हुआ और तकनीकी सहयोग का रास्ता साफ हो गया।

विज्ञापन


ऐसे प्रयोगों के लिए डॉ. चौहान काफी अनुभवी हैं। इन्हीं की देखरेख में देश की पहली क्लोन गाय गंगा मार्च 2023 में जन्म ले चुकी है। इस वक्त बद्री नस्ल की गाय को बचाने के लिए भी क्लोनिंग प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
विज्ञापन


क्लोनिंग की तकनीक रहस्यमय
इस मिशन में सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें किसी कोशिका का नाभिक निकालकर उसे अंडाणु में डाला जाता है और बिजली की सूक्ष्म तरंगों से भ्रूण को जीवन देने की कोशिश की जाती है। विज्ञान और प्रकृति का यह संगम जितना रोमांचक है, उतना ही संवेदनशील भी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सफेद बाघ की दास्तां रीवा से रूस तक
भारत में सफेद बाघ की कहानी 1951 से शुरू होती है, जब रीवा (मध्य प्रदेश) के महाराजा मार्तंड सिंह ने पहला सफेद बाघ पकड़ा और उसका नाम रखा मोहन। तब से रीवा को व्हाइट टाइगर सिटी कहा जाने लगा। आज सफेद बाघ की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में चार से पांच करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। यही वजह है कि रूस इस क्लोनिंग प्रोजेक्ट को आर्थिक और पर्यटन दृष्टि से बड़ा कदम मान रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed