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Nainital News: नियंत्रित तापमान में जड़ी-बूटी सुखाने से एंटीऑक्सीडेंट क्षमता में रिकॉर्ड सुधार

Wed, 29 Jul 2026 02:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Wed, 29 Jul 2026 02:13 AM IST
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Record improvement in antioxidant capacity by drying herbs at controlled temperatures.
जड़ी-बूटियों की जानकारी लेती आभा। स्रोत स्वयं
नैनीताल। कड़क धूप में जड़ी-बूटियों को सुखाकर उनकी उम्र बढ़ाने की सदियों पुरानी थ्योरी को कुमाऊं विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग से आई एक हालिया रिसर्च ने पूरी तरह पलट दिया है। विभाग की प्रो. गीता तिवारी के निर्देशन में शोधार्थी आभा ने प्रयोगशाला में यह साबित किया है कि अगर अदरक और कपूर कचरी के कंदों (राइजोम) को कड़क धूप के बजाय 30 से 50 डिग्री सेल्सियस के नियंत्रित तापमान पर सुखाया जाए तो उनके भीतर का औषधीय संसार पूरी तरह बदल जाता है। यह खोज आने वाले दिनों में ग्लोबल फार्मा, न्यूट्रास्यूटिकल्स और ब्यूटी उद्योग के लिए एक नया टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
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स्ट्रेस और आंतरिक सूजन रोकने में अचूक
वैज्ञानिक विश्लेषण के दौरान शोधार्थी आभा ने तेलों की मुक्त कणों से लड़ने की क्षमता जांचने के लिए अत्याधुनिक डीपीपीएच रेडिकल स्केवेंजिंग परीक्षण का उपयोग किया। नियंत्रित ओवन और स्मार्ट छांव में सुखाए गए कंदों से प्राप्त एसेंशियल ऑयल ने उच्चतम एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि का प्रदर्शन किया। शोध के मुताबिक सुखाने की इस नियंत्रित वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण पौधों के वाष्पशील यौगिक नष्ट होकर हवा में उड़ने के बजाय ऑक्सीजनेटेड मोनोटरपीन्स में तब्दील हो गए जो मानव शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और आंतरिक सूजन को रोकने में अचूक माने जाते हैं।
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लैब की कसौटी पर नए आंकड़े
आधुनिक जीसी-एमएस टेस्ट के अनुसार, कम तापमान पर सुखाने से अदरक के मुख्य कैंसर-रोधी और पाचक घटक गेरानियाल की मात्रा 17.53 फीसदी से सीधे उछलकर 35.24 फीसदी (लगभग दोगुनी) दर्ज की गई, जबकि नेराल भी 12.47 फीसदी से बढ़कर 24.59 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया। कपूर कचरी के कंदों में तो और भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। इसमें सांस की बीमारियों और सूजन को जड़ से ठीक करने वाला मुख्य तत्व 1, 8-सिनेओल 14.62 फीसदी से रिकॉर्ड तोड़ छलांग लगाते हुए सीधे 53.87 फीसदी पर पहुंच गया, जो कि मूल क्षमता से तीन गुना से भी अधिक है। इसके अलावा, इसका सक्रिय यौगिक α-कैडिनॉल भी 25.06 फीसदी दर्ज किया गया।
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खेत से फार्मा तक सीधा मुनाफा
शोध के मुताबिक यदि जड़ी-बूटी उत्पादक किसान फसलों को सीधे तीखी धूप में सुखाने की पुरानी जिद की जगह इस नियंत्रित तापमान तकनीक को अपनाएं, तो उन्हें बाजार में कई गुना बेहतर व्यावसायिक मूल्य मिलेगा। दूसरी तरफ देश की बड़ी एरोमाथेरेपी निर्माता कंपनियों को अब अंतरराष्ट्रीय मानक का कच्चा माल भारत के ही खेतों से मिल सकेगा जिससे देश के हर्बल और फार्मास्युटिकल क्षेत्र को वैश्विक बाजार में नई मजबूती मिलेगी।

जड़ी-बूटियों की जानकारी लेती आभा। स्रोत स्वयं

जड़ी-बूटियों की जानकारी लेती आभा। स्रोत स्वयं

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