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अब नहीं पीना पड़ेगा दुर्गंध युक्त पानी
राजीव शुक्ला
Updated Sat, 17 Sep 2016 02:11 AM IST
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- फोटो : Getty Images
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राज्य के लोगों को अब हैंडपंप से आने वाले लाल और दुर्गंध वाले पानी से निजात मिलेगी। 10 जिलों में जल संस्थान नई तकनीक से लगभग 451 हैंडपंप लगाने की तैयारी में है। एक हैंडपंप पर लगभग 30 से 35 हजार रुपये खर्च होने की उम्मीद है।
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राज्य के विभिन्न जिलों में लगे हैंडपंपों से अक्सर लाल रंग का पानी आने के साथ ही दुर्गंध की शिकायत आती है। जल संस्थान के आलाधिकारियों का मानना है कि लोहे का अधिक प्रयोग होने के कारण लाल रंग का पानी आता है।
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राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग 9,500 हैंडपंप हैं। प्रयोग के तौर पर दस जिलों में लगभग 451 हैंडपंप लगाने की योजना है। पौड़ी में 71, चमोली में 56, रुद्रप्रयाग में 47, टिहरी में 114, पिथौरागढ़ में 15, उत्तरकाशी में 08, चंपावत में 25, बागेश्वर में 46, अल्मोड़ा में 28 और नैनीताल में 41 हैंडपंप लगाए जाएंगे।
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हैंडपंप में तीन चैंबर होंगे। पहले और दूसरे चैंबर में कोयले का प्रयोग किया जाएगा। जबकि तीसरे चैंबर में रेत का प्रयोग होगा। साथ ही फिल्टर मीडिया का प्रयोग भी किया जाएगा। जिससे गंदा पानी न आ सके। नई तकनीक अगर सफल होती है तो भविष्य में अन्य हैंडपंप भी लगाए जा सकते हैं।
नई तकनीक से हैंडपंप लगाने के लिए एक सप्ताह के भीतर कंपनियों को आमंत्रित करने के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। इन हैंडपंपों का रखरखाव गांव के लोगों को आपसी सहयोग से करना होगा।
- एसके गुप्ता ,मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान