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लापरवाही : एक मार्च को हुआ घायल, 13 को मौत और 23 मार्च को पोस्टमार्टम
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हल्द्वानी। इसे जिम्मेदारों की लापरवाही ही मानी जाए कि एक व्यक्ति घायल हुआ और 13 मार्च को उसकी मौत हो गई। शव पोस्टमार्टम हाउस के मोर्चरी में रखा गया। इस शव का न मेमो आया और न ही अस्पताल से संबंधित चौकी को बताया गया। 18 मार्च को कागज मेडिकल चौकी को मिला तो पंचनामा बना। उसकी शिनाख्त अब तक नहीं हो सकी है।
एक मार्च को 50 वर्षीय व्यक्ति को घायलावस्था में 102 एंबुलेंस के जरिये लाकर एसटीएच में भर्ती कराया गया था। उसके सिर में गंभीर चोट थी। वह सड़क हादसे में घायल हुआ था। शिनाख्त न होने के कारण उसकी पूरी जानकारी विभाग के पास नहीं मिल सकी। फिर 13 मार्च को उसकी मौत हो गई। उसकी पहचान करने वाला कोई मिला। ऐसे में शव अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया। आमतौर पर शव भेजने के साथ ही मेडिकल पुलिस चौकी को मेमो (लिखित सूचना) भेजा जाता है और पंचनामा के चौथे दिन अज्ञात लाशों का पोस्टमार्टम होता है। छह दिन तक अज्ञात लाश अज्ञात के रूप में मोर्चरी में कैद रही। 18 मार्च को मेडिकल पुलिस चौकी को कागज मिला तो इसका पंचनामा भरा गया। रविवार (23 मार्च) को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार रानीबाग में कराया गया।
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एक मार्च को 50 वर्षीय व्यक्ति को घायलावस्था में 102 एंबुलेंस के जरिये लाकर एसटीएच में भर्ती कराया गया था। उसके सिर में गंभीर चोट थी। वह सड़क हादसे में घायल हुआ था। शिनाख्त न होने के कारण उसकी पूरी जानकारी विभाग के पास नहीं मिल सकी। फिर 13 मार्च को उसकी मौत हो गई। उसकी पहचान करने वाला कोई मिला। ऐसे में शव अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया। आमतौर पर शव भेजने के साथ ही मेडिकल पुलिस चौकी को मेमो (लिखित सूचना) भेजा जाता है और पंचनामा के चौथे दिन अज्ञात लाशों का पोस्टमार्टम होता है। छह दिन तक अज्ञात लाश अज्ञात के रूप में मोर्चरी में कैद रही। 18 मार्च को मेडिकल पुलिस चौकी को कागज मिला तो इसका पंचनामा भरा गया। रविवार (23 मार्च) को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार रानीबाग में कराया गया।
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