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कुमाऊंनी साहित्य के पुरोधा मथुरा दत्त मठपाल का निधन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 02:07 AM IST
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Mathura Dutt Mathpal, the pioneer of Kumaoni literature, passed away
रामनगर (नैनीताल)। कुमाऊंनी साहित्य के पुरोधा 80 वर्षीय मथुरादत्त मठपाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। पिछले दो महीने से न्यूरो और फेफड़े संबंधी बीमारी से ग्रस्त मठपाल ने रविवार सुबह साढ़े सात बजे अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे बेटे नवेंदु मठपाल समेत पोते-पोतियों से भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
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मथुरादत्त मठपाल का जन्म 29 जून, 1941 को अल्मोड़ा जिले के नौला गांव, भिकियासैंण में हुआ था। उन्हें कुमाऊंनी भाषा कार्यों के लिए 2014 के साहित्य अकादमी भाषा सम्मान से नवाजा गया। वह 35 साल तक इंटर कालेज विनायक, भिकियासैंण में इतिहास के प्रवक्ता रहे। शिक्षण से तीन साल पहले ही कुमाऊंनी भाषा की सेवा के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले मठपाल ने 20 सालों तक अनवरत रूप से कुमाऊंनी पत्रिका दुदबोलि का संपादन किया। उनकी अंतिम यात्रा के दौरान रंगकर्मी ललित बिष्ट, अजेंद्र सुंदरियाल, मानसी रावत ने उनकी कविताओं का स्वर वादन करते हुए उन्हें अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। उनकी चिता को मुखाग्नि उनके पुत्र नवेंदु मठपाल, भतीजे दिनेश मठपाल, प्रकाश मठपाल ने दी।
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कुमाऊंनी साहित्य को दी दिशा
रामनगर। आंग-आंग चिचेल हैगो, पे मैं क्यापक क्याप कै भेटनु, फिर प्योली हंसे, मनख सतसई, राम नाम भौत ठुल उनकी कुमाऊंनी में प्रकाशित पुस्तकें हैं। पिछले वर्ष कुमाऊंनी भाषा में पहली बार 100 कुमाऊंनी कहानियों की पुस्तक, ‘कौ सुवा काथ कौ’ मठपाल जी के सम्पादन में प्रकाशित हुई। उन्होंने कुमाऊंनी कवि शेरसिंह बिष्ट, हीरा सिंह राणा, गोपालदत्त भट्ट की कविताओं का पहली बार हिंदी में अनुवाद कर प्रकाशित करवाया। हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्थवाल की 80 कविताओं का भी कुमाऊंनी में अनुवाद किया। स्वास्थ्य खराब होने से पहले वे कुमाऊंनी की 200 सर्वश्रष्ठ कविताओं के प्रकाशन पर काम कर रहे थे। मठपाल ने कुमाऊंनी भाषा के उत्थान के लिए 1989, 90 और 91 में क्रमश: अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल में भाषा सम्मेलन आयोजित करवाए। 2018, 19 में कुमाऊंनी गढ़वाली भाषा सम्मेलन रामनगर में आयोजित करवाए।
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कई सम्मान मिले
रामनगर। मठपाल को साहित्य अकादमी के साथ-साथ अनेकानेक सम्मानों से नवाजा गया। 1989 में यूपी सरकार ने उनको सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार से नवाजा। इसके अलावा 2009 में कुमाऊंनी साहित्य सेवी सम्मान, 2011 में उत्तराखंड भाषा सम्मान, इसी साल गोबिंद चातक सम्मान, शेलवानी साहित्य सम्मान, हिमवंत साहित्य सम्मान, चंद्रकुंवर बर्थवाल साहित्य सेवा श्री सम्मान और 2015 में शेर सिंह बिष्ट अनपढ़ कुमाऊंनी कविता पुरस्कार से भी उनको सम्मानित किया गया था।
इन्होंने जताया शोक
उनके निधन पर विधायक दीवान सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक रणजीत रावत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, ब्लॉक प्रमुख रेखा रावत, इंदर रावत, डॉ. निशांत पपनै, राकेश नैनवाल, नरेंद्र शर्मा, ताराचंद्र घिल्डियाल, ज्ञान पंत, आदि ने शोक जताया है।

साहित्यकारों ने जताया शोक....
अल्मोड़ा से प्रकाशित अचल पत्रिका की ऐतिहासिक भूमिका के बाद दुदबोलि पत्रिका के माध्यम से मठपाल जी ने जो स्तरीय प्रकाशन किया वह उनकी विद्वता, काव्य संस्कार और भाषा के असामान्य ज्ञान के कारण ही सम्भव हो पाया।
शेखर जोशी, हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार
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