मौत के 36 घंटे बाद हुआ कमला का पोस्टमार्टम: दो दिन भटके परिजन, डीएम से गुहार के बाद हरकत में आए अधिकारी
भीमताल के थलाड़ी क्वेदल निवासी कमला देवी (26) का शव 15 अक्तूबर को पेड़ से लटका मिला था। प्रशासनिक लेटलतीफी से मौत के करीब 36 घंटे बाद शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम हुआ।
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एक तरफ बेटी को खोने का गम, दूसरी तरफ शव के पोस्टमार्टम के लिए दर-दर भटकने की बेबसी। कमला की मौत से टूटे परिजनों को व्यवस्था की बेरुखी ने और तोड़ दिया। प्रशासनिक लेटलतीफी ऐसी कि मौत के करीब 36 घंटे बाद शनिवार दोपहर शव का पोस्टमार्टम हो सका। शुक्रवार रात मोर्चरी में इंतजार से बेहाल परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा, लेकिन जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी।
भीमताल के धारी ब्लॉक के थलाड़ी क्वेदल निवासी कमला देवी (26) का शव 15 अक्तूबर को खेत में पेड़ से फंदे पर लटका मिला था। उनके भाई कुंदन सिंह के अनुसार, बड़ी बहन माधवी ने फोन पर कमला के लापता होने की जानकारी दी थी। तलाश के दौरान उसका शव मिला। परिजन उसे ओखलकांडा पीएचसी ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कमला की शादी को छह वर्ष हुए थे। ऐसे में मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम और पंचनामा की प्रक्रिया होनी थी। 16 अक्तूबर को धारी की तहसीलदार मनीषा बिष्ट ने पंचनामा भरा। शाम करीब 5:30 बजे शव हल्द्वानी मोर्चरी पहुंचा। अगले दिन न तहसीलदार पहुंचीं और न संबंधित दरोगा। एक सिपाही दस्तावेज लेकर आया, लेकिन पोस्टमार्टम नहीं हुआ। परिजन नेताओं से लेकर डीएम तक गुहार लगाते रहे। बाद में डीएम से बातचीत के बाद अधिकारी मोर्चरी पहुंचे और प्रक्रिया पूरी हुई। एसटीएच के फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने शुक्रवार रात आक्रोशित परिजनों को समझाकर शांत कराया।
मोबाइल को लेकर हुआ था विवाद
कुंदन सिंह के मुताबिक, कमला और उसके पति लाल सिंह के बीच मोबाइल साथ ले जाने को लेकर विवाद हुआ था। लाल सिंह मजदूरी पर जाते समय मोबाइल ले गया। कुछ देर बाद कमला का शव फंदे पर मिला। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
तहसीलदार की तरफ से भेजे गए पत्र में केवल पैनल से पोस्टमार्टम कराए जाने की बात लिखी थी जबकि ऐसे मामलों में वीडियोग्राफी भी कराई जाती है। मजिस्ट्रेट या प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी में ही पोस्टमार्टम होता है। कई बार कॉल करने के बावजूद अधिकारी समय से नहीं पहुंचे थे। डॉ. एके सिंह, विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक, एसटीएच
पीएचसी से सूचना मिलते ही संबंधित थाने की पुलिस को मौके पर भेज दिया गया था। शादी को छह वर्ष हुए थे इसलिए पंचानामे की प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारी करते हैं। वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी मोर्चरी में प्रक्रिया के दौरान क्यों नहीं रही इसकी जांच की जाएगी। डॉ. जगदीश चंद्र, एसपी क्राइम, नैनीताल