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झील मेें बनेगा मैदान
गिरीश रंजन तिवारी/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Sat, 23 Apr 2016 01:43 AM IST
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नैनीताल
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। नैनीझील में बीते कुछ महीनों से लगातार घट रहे जलस्तर के चलते किनारों में मैदान नजर आने लगे हैं। ऐसे हालात झील में पहली बार हुए हैं। नगर के बडे़ बुजुर्गों ने अपने जीवनकाल में जलस्तर इतना नीचे जाते कभी नहीं देखा न ही नगर के इतिहास से जुडे़ दस्तावेजों में ऐसा कोई जिक्र है।
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स्थिति इतनी गंभीर है कि झील का जल स्तर शून्य से बहुत नीचे चला गया है और जल स्तर नापे जाने का स्केल ही अप्रासंगिक हो गया है। खास बात यह है कि ये हालात कोई रातों रात नहीं हुए हैं। बीते कई दशकों में झील में भारी तादाद में मलबा जाने से भी हालात बदतर हुए हैं और यही मलबा किनारों पर जमा होने से वहां भीतर मैदान का रूप ले चुके हैं जो अब जलस्तर घटने पर नजर आने लगे हैं।
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झील में मलबा जाने का सिलसिला दशकों से जारी है। खासकर 1980 के दशक में जबसे यहां निर्माण कार्यों में अचानक तेजी आई और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के दौरान लोगों ने नालों को मलबे से पाटना शुरू कर दिया। हर बरसात में यही मलबा मालरोड और झील में भरकर इनकी दुर्गति करता रहा है। विशेषकर प्री मानसून वर्षा प्रारंभ होते ही साल भर से नालों में भरा मलबा मालरोड व झील तक पहुंचना हर वर्ष दोहराया जाता है। जाहिर है केवल प्रशासनिक सख्ती से नहीं बल्कि लोगों के जागरूक हुए बिना यह सिलसिला नहीं थम सकता।
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1980 के दशक में यहां प्रतिवर्ष बरसात शुरू होते ही माल व झील में मलबा भर जाने की शुरूआत हो गई थी अमर उजाला ने प्रतिवर्ष हो रही इस घटना के संबंध में 24 जून 89 के अंक में समाचार प्रकाशित करते हुए आगाह किया था कि यदि शीघ्र ही मलबा नालों में डालने व बहकर झील में आने से रोका नहीं गया तो कुछ वर्षों में झील में मैदान नजर आने लगेगा। एक खेल मैदान और मिलने वाला है; शीर्षक से प्रकाशित समाचार में कहा गया था कि जिस प्रकार मल्लीताल फ्लैट्स का निर्माण 1881 के भूस्खलन के मलबे से हुआ था उसी तरह नालों से आ रहे मलबे से झील में और मैदान भी बन सकते हैं।
हालांकि प्रशासन की ढिलाई और नागरिकों में जागरूकता न होने से यह सिलसिला अनवरत जारी रहा और आज वास्तव में झील में मैदान नजर आने लगे हैं। प्रकृति के इस संकेत के बावजूद आज भी यदि लोग व प्रशासन नहीं चेते तो कभी न कभी पूरी झील मलबे से पट सकती है और उस भयावह स्थिति की मात्र कल्पना ही की जा सकती है।