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Nainital News: पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे एवरेस्ट विजेता सुबोध
Fri, 31 Jul 2026 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:17 PM IST
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भवाली (नैनीताल)। देवभूमि ने देश को कई ऐसे सपूत दिए हैं जिन्होंने अपने साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इन्हीं में एक हैं एसएसबी के पर्वतारोही भवाली निवासी सुबोध कुमार चंदोला, जिन्होंने तीन दशक में कई जवानों व अन्य लोगों को पर्वतारोहण और कठिन परिस्थितियों में जीवटता का प्रशिक्षण देकर देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
16 फरवरी 1970 को जन्मे सुबोध कुमार चंदोला मार्च 1996 में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) से जुड़े। वर्तमान में वह ग्वालदम स्थित सीआई एंड जेडब्ल्यू स्कूल में फील्ड ऑफिसर हैं। उन्होंने कुमाऊं विवि से स्नातकोत्तर किया। उनका पर्वतारोहण सफर वर्ष 1990 में नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब से शुरू हुआ। सुबोध की सबसे बड़ी उपलब्धि 21 मई 2013 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना रही। इसके अलावा उन्होंने जोगिन-1, जोगिन-3, भगीरथी-2, त्रिशूल, गंगोत्री -I सतोपंथ, कामेट, अभिगामिन, टेल्स पास, हनुमान टिब्बा, थेलू, रूद्रगैढा व सैफे (6161 मीटर) जैसी 2 दर्जन से अधिक दुर्गम चोटियों पर सफल अभियान का नेतृत्व किया और सफलता हासिल की।
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सुबोध कुमार चंदोला को वर्ष 2018 में भारतीय पुलिस पदक, 2015-16 में केंद्रीय गृह मंत्री पुरस्कार, 2011-12 में डीजी सिल्वर एवं गोल्ड मेडल, 2013 में महानिदेशक स्वर्ण पदक व 2021 में उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
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सुबोध ने बताया कि लोग बुग्यालों का ध्यान नहीं रख रहे हैं और जगह-जगह प्लास्टिक, खुले में शौच और अन्य गंदगी फैला रहे हैं। बताया कि जब भी वह पर्वतारोहण करते हैं तो लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं।
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16 फरवरी 1970 को जन्मे सुबोध कुमार चंदोला मार्च 1996 में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) से जुड़े। वर्तमान में वह ग्वालदम स्थित सीआई एंड जेडब्ल्यू स्कूल में फील्ड ऑफिसर हैं। उन्होंने कुमाऊं विवि से स्नातकोत्तर किया। उनका पर्वतारोहण सफर वर्ष 1990 में नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब से शुरू हुआ। सुबोध की सबसे बड़ी उपलब्धि 21 मई 2013 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना रही। इसके अलावा उन्होंने जोगिन-1, जोगिन-3, भगीरथी-2, त्रिशूल, गंगोत्री -I सतोपंथ, कामेट, अभिगामिन, टेल्स पास, हनुमान टिब्बा, थेलू, रूद्रगैढा व सैफे (6161 मीटर) जैसी 2 दर्जन से अधिक दुर्गम चोटियों पर सफल अभियान का नेतृत्व किया और सफलता हासिल की।
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उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सुबोध कुमार चंदोला को वर्ष 2018 में भारतीय पुलिस पदक, 2015-16 में केंद्रीय गृह मंत्री पुरस्कार, 2011-12 में डीजी सिल्वर एवं गोल्ड मेडल, 2013 में महानिदेशक स्वर्ण पदक व 2021 में उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
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सुबोध ने बताया कि लोग बुग्यालों का ध्यान नहीं रख रहे हैं और जगह-जगह प्लास्टिक, खुले में शौच और अन्य गंदगी फैला रहे हैं। बताया कि जब भी वह पर्वतारोहण करते हैं तो लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं।