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Nainital News: उत्तराखंड से राज्यसभा में पहली बार भाजपा के एससी सांसद बने दिनेश आर्या
Sun, 11 Oct 2026 12:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:46 AM IST
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नैनीताल। उत्तराखंड राज्य के गठन के करीब 26 साल बाद भाजपा ने राज्यसभा के लिए ऐसा राजनीतिक चेहरा आगे किया है, जिसके साथ प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया अध्याय जुड़ रहा है। दिनेश आर्या को राज्यसभा भेज कर भाजपा ने उत्तराखंड में नई परंपरा शुरू की है।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह पहली बार है जब भाजपा की ओर से किसी अनुसूचित जाति (एससी) से आने वाले नेता को राज्यसभा भेजा गया है। इससे पहले भाजपा ने उत्तराखंड से मनोहर कांत ध्यानी, संघप्रिय गौतम, सुषमा स्वराज, भगत सिंह कोश्यारी, तरुण विजय, अनिल बलूनी, नरेश बंसल, कल्पना सैनी और महेंद्र भट्ट जैसे नेताओं को राज्यसभा भेजा था।
मनोहर कांत ध्यानी और संघप्रिय गौतम का कार्यकाल उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ था और राज्य गठन के बाद उनका प्रतिनिधित्व उत्तराखंड से माना गया। इन सब में संघप्रिय गौतम अवश्य एससी वर्ग से थे लेकिन उनका मूल चयन उत्तर प्रदेश के कोटे से हुआ था। इस प्रकार उत्तराखंड बनने के बाद यह पहली बार है जब एससी समुदाय से भाजपा से कोई नेता राज्यसभा पहुंचा है।
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भाजपा से पूर्व के राज्यसभा सांसदों में सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता जरूर रही, लेकिन पृथक उत्तराखंड से भाजपा की ओर से एससी समुदाय का कोई नेता राज्यसभा नहीं पहुंचा। यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि प्रदीप टम्टा कांग्रेस के टिकट पर 2016 में उत्तराखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। यानी राज्यसभा में एससी प्रतिनिधित्व का अध्याय उत्तराखंड में पहले शुरू हो चुका था, लेकिन भाजपा के खाते में यह पहली बार आया है।
दिनेश आर्या का नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष रहने के अलावा भाजपा अनुसूचित मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। आर्या के चयन का समय भी महत्वपूर्ण है। 2027 का विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं है। ऐसे में राज्यसभा जैसे सांविधानिक पद के लिए एससी समुदाय के संगठनात्मक रूप से सक्रिय चेहरे को आगे करना भाजपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है।
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उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह पहली बार है जब भाजपा की ओर से किसी अनुसूचित जाति (एससी) से आने वाले नेता को राज्यसभा भेजा गया है। इससे पहले भाजपा ने उत्तराखंड से मनोहर कांत ध्यानी, संघप्रिय गौतम, सुषमा स्वराज, भगत सिंह कोश्यारी, तरुण विजय, अनिल बलूनी, नरेश बंसल, कल्पना सैनी और महेंद्र भट्ट जैसे नेताओं को राज्यसभा भेजा था।
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मनोहर कांत ध्यानी और संघप्रिय गौतम का कार्यकाल उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ था और राज्य गठन के बाद उनका प्रतिनिधित्व उत्तराखंड से माना गया। इन सब में संघप्रिय गौतम अवश्य एससी वर्ग से थे लेकिन उनका मूल चयन उत्तर प्रदेश के कोटे से हुआ था। इस प्रकार उत्तराखंड बनने के बाद यह पहली बार है जब एससी समुदाय से भाजपा से कोई नेता राज्यसभा पहुंचा है।
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भाजपा से पूर्व के राज्यसभा सांसदों में सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता जरूर रही, लेकिन पृथक उत्तराखंड से भाजपा की ओर से एससी समुदाय का कोई नेता राज्यसभा नहीं पहुंचा। यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि प्रदीप टम्टा कांग्रेस के टिकट पर 2016 में उत्तराखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। यानी राज्यसभा में एससी प्रतिनिधित्व का अध्याय उत्तराखंड में पहले शुरू हो चुका था, लेकिन भाजपा के खाते में यह पहली बार आया है।
दिनेश आर्या का नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष रहने के अलावा भाजपा अनुसूचित मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। आर्या के चयन का समय भी महत्वपूर्ण है। 2027 का विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं है। ऐसे में राज्यसभा जैसे सांविधानिक पद के लिए एससी समुदाय के संगठनात्मक रूप से सक्रिय चेहरे को आगे करना भाजपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है।