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क्लासरूम में पढ़ाई करने में अब बच्चे बोर नहीं खुश होंगे
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हल्द्वानी खालसा इंटर कॉलेज में आयोजित आनंदम की कार्यशाला में बोलती भावना भंडारी व उपस्थित अध्या
हल्द्वानी। क्लासरूम में पढ़ने में अब बच्चों को न कोई टेंशन होगी और ही बच्चे बोर होंगे। बच्चों को खुशनुमा माहौल में पढ़ाने के आसान तरीके समझाने के लिए शिक्षा विभाग ने आनंदम योजना के तहत कार्य शुरू कर दिया है। खालसा नेशनल बालिका इंटर कॉलेज के सभागार में बुधवार को दो दिवसीय एक्सपीरियन्सियल लर्निंग (आनंदम) कार्यशाला शुरू हुई। इसमें पहले दिन हल्द्वानी विकासखंड के प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक से लेकर इंटरमीडिएट विद्यालयों के 50 से अधिक प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक सीमा जौनसारी ने इस योजना की शुरूआत ड्रीम प्रोजेक्ट की तरह की है। बुधवार को यहां शुरू हुए प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि चाहे प्राइमरी की कक्षा हो या फिर इंटर कालेज की कक्षा, किसी भी कक्षा में बच्चों को इस तरह पढ़ाना होगा कि बच्चों को पढ़ाई बोझिल न लगे। डायट के प्रशिक्षकों मनोज कुमार चौधरी, गौरव जोशी और हल्द्वानी विकासखंड से भावना भंडारी एवं डिकर सिंह पडियार ने शिक्षण कार्य के आसान और रुचिकर तरीके बताए। डायट के प्रशिक्षकों ने बताया कि आनंदम पाठ्यक्रम के चार स्तंभों ध्यान देना, विभिन्न गतिविधियों, कहानी तथा अभिव्यक्ति से संबधित गतिविधियों के सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यशाला के पहले दिन प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि तथा आवश्यकता और गतिविधि से संबंधित गतिविधियां कराई गईं।
ये फायदा होगा
-विद्यालयों में इस कार्यक्रम के लागू होने से विद्यार्थियों को सीखने में आनंद का अनुभव होगा।
- विद्यालय में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बनाना होगा ताकि बच्चों को क्लासरूम में पढ़ने में किसी तरह की टेंशन का अहसास न हो।
- बच्चों में मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी तथा भविष्य में बच्चे अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में अपना अधिकतम योगदान दे सकेंगे।
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-प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जाए कि उन्हें बोरियत न हो और क्लासरूम का माहौल खुशनुमा रहे।
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राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक सीमा जौनसारी ने इस योजना की शुरूआत ड्रीम प्रोजेक्ट की तरह की है। बुधवार को यहां शुरू हुए प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि चाहे प्राइमरी की कक्षा हो या फिर इंटर कालेज की कक्षा, किसी भी कक्षा में बच्चों को इस तरह पढ़ाना होगा कि बच्चों को पढ़ाई बोझिल न लगे। डायट के प्रशिक्षकों मनोज कुमार चौधरी, गौरव जोशी और हल्द्वानी विकासखंड से भावना भंडारी एवं डिकर सिंह पडियार ने शिक्षण कार्य के आसान और रुचिकर तरीके बताए। डायट के प्रशिक्षकों ने बताया कि आनंदम पाठ्यक्रम के चार स्तंभों ध्यान देना, विभिन्न गतिविधियों, कहानी तथा अभिव्यक्ति से संबधित गतिविधियों के सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यशाला के पहले दिन प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि तथा आवश्यकता और गतिविधि से संबंधित गतिविधियां कराई गईं।
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ये फायदा होगा
-विद्यालयों में इस कार्यक्रम के लागू होने से विद्यार्थियों को सीखने में आनंद का अनुभव होगा।
- विद्यालय में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बनाना होगा ताकि बच्चों को क्लासरूम में पढ़ने में किसी तरह की टेंशन का अहसास न हो।
- बच्चों में मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी तथा भविष्य में बच्चे अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में अपना अधिकतम योगदान दे सकेंगे।
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-प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जाए कि उन्हें बोरियत न हो और क्लासरूम का माहौल खुशनुमा रहे।