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छठ महापर्व- डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, श्रृद्धालुओं ने की छठी माता की पूजा
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हल्द्वानी। सूर्य भगवान को समर्पित चार दिवसीय छठ पर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने छठ पूजा स्थल पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। सोमवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद त्योहार का समापन होगा। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।
रविवार को एसटीएच के पास बने छठ पूजा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। छठी माता के भजन गाए गए। छठ घाट स्थल पर बने मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पूजा स्थल पर करीब 31 मंदिर बनाए गए हैं। सभी मंदिरों में अलग-अलग समूहों में महिलाओं ने सज संवरकर माता छठी की पूजा की। इस दौरान वेदी पर गन्ना भी चढ़ाया गया। डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
करीब दस हजार लोग पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। फलों से सजी टोकरी को लोग अपने सिर में रखकर पूजा स्थल तक लाए। इसके बाद वेदी पूजा की गई। व्रती महिलाएं सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत तोड़ेंगी।
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इस मौके पर मेयर जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला, विधायक सुमित हृदयेश, हेमंत द्विवेदी, अमित बिष्ट, छठ पूजा सेवा समिति के अध्यक्ष कृष्ण साह, उपाध्यक्ष शंकर भगत, छोटे लाल साह, जय प्रकाश, सुरेश भगत, प्रभा साह, मुरारी प्रसाद, वीरू पंडित, कार्यकारी अध्यक्ष बिंदेश्वर सिंह आदि मौजूद रहे।
प्रसाद के लिए 45 फल और खाद्य पदार्थ बनाए गए
हल्द्वानी। श्रद्धालुओं ने छठी माता के मंदिर में फलों की टोकरी (प्रसाद) रखकर पूजा-अर्चना की। प्रसाद 45 तरह के फलों और खाद्य पदार्थों से तैयार किया गया। महिलाओं के साथ पुरुष भी फलों की टोकरी को सिर में रखकर पूजा स्थल तक लाए। मनोकामना पूर्ण करने के लिए लोगों ने वेदी में गन्ने की कोसिन चढ़ाई। मान्यता है कि जिन लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। वह माता छठी को सुविधानुसार गन्ने की कोसिन चढ़ाते हैं। इस दौरान घाट पर महिलाओं ने फलों की टोकरी को पानी में डूबोकर सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद वह इसे घर ले गए। अर्घ्य देने के बाद प्रसाद का वितरण हुआ। सोमवार सुबह नई फलों की टोकरी को पानी में डूबोकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रती महिलाएं अपना व्रत तोड़ेंगी। प्रसाद वितरण के बाद छठ महापर्व का समापन होगा।
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रविवार को एसटीएच के पास बने छठ पूजा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। छठी माता के भजन गाए गए। छठ घाट स्थल पर बने मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। पूजा स्थल पर करीब 31 मंदिर बनाए गए हैं। सभी मंदिरों में अलग-अलग समूहों में महिलाओं ने सज संवरकर माता छठी की पूजा की। इस दौरान वेदी पर गन्ना भी चढ़ाया गया। डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
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करीब दस हजार लोग पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। फलों से सजी टोकरी को लोग अपने सिर में रखकर पूजा स्थल तक लाए। इसके बाद वेदी पूजा की गई। व्रती महिलाएं सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत तोड़ेंगी।
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इस मौके पर मेयर जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला, विधायक सुमित हृदयेश, हेमंत द्विवेदी, अमित बिष्ट, छठ पूजा सेवा समिति के अध्यक्ष कृष्ण साह, उपाध्यक्ष शंकर भगत, छोटे लाल साह, जय प्रकाश, सुरेश भगत, प्रभा साह, मुरारी प्रसाद, वीरू पंडित, कार्यकारी अध्यक्ष बिंदेश्वर सिंह आदि मौजूद रहे।
प्रसाद के लिए 45 फल और खाद्य पदार्थ बनाए गए
हल्द्वानी। श्रद्धालुओं ने छठी माता के मंदिर में फलों की टोकरी (प्रसाद) रखकर पूजा-अर्चना की। प्रसाद 45 तरह के फलों और खाद्य पदार्थों से तैयार किया गया। महिलाओं के साथ पुरुष भी फलों की टोकरी को सिर में रखकर पूजा स्थल तक लाए। मनोकामना पूर्ण करने के लिए लोगों ने वेदी में गन्ने की कोसिन चढ़ाई। मान्यता है कि जिन लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। वह माता छठी को सुविधानुसार गन्ने की कोसिन चढ़ाते हैं। इस दौरान घाट पर महिलाओं ने फलों की टोकरी को पानी में डूबोकर सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद वह इसे घर ले गए। अर्घ्य देने के बाद प्रसाद का वितरण हुआ। सोमवार सुबह नई फलों की टोकरी को पानी में डूबोकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रती महिलाएं अपना व्रत तोड़ेंगी। प्रसाद वितरण के बाद छठ महापर्व का समापन होगा।

हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल के पास स्थित छठ पूजा स्थल में पर डुबते सूर्य को अर्घ्य देती महिल