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मूंज घास से निर्मित आभूषण से निखरेगा सौंदर्य

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2020 01:33 AM IST
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Beauty made from jewel grass will enhance beauty
मूंज की घास से तैयार आभूषण को पहने हुए महिला
हल्द्वानी। जरूरी नहीं कि सोने के आभूषण ही महिलाओं के शृंगार में चार चांद लगाएं। फैशन के इस दौर में मूंज घास से निर्मित कंगन और मांग टीका सहित अन्य आभूषण सुंदरता को चमका सकती है। रामनगर के राजपुर की थारू बुक्सा महिलाओं को इस घास से आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उनके बनाए गए उत्पाद पर्यटकों को भी लुभाएंगे। प्रशिक्षण जिला उद्योग केंद्र की ओर से दिया गया है।
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जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विपिन कुमार ने बताया कि बुक्सा महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन योजना के तहत दो महीने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में डिजाइनर रविशेखर ने महिलाओं को मूंज की घास से मांगटीका, नेकलेस, इयरिंग, नैक बैंड, चूड़ियां तैयार करना सिखाया है। ज्यादातर महिलाएं मूंज की घास से टोकरी बनाने में सक्षम हैं, लेकिन एक टोकरी तैयार करने में एक महीने का समय लगता है इसलिए महिलाओं को कम समय में तैयार किए जाने वाले मूंज के आभूषण बनाना सिखाया गया।
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सैलानियों को लुभाएंगे
डीआईसी जीएम विपिन कुमार ने बताया कि इन आभूषणों को देश-विदेश के पर्यटकों के सामने रखा जाएगा जिससे कि बाजार मिल सके। नैनीताल कलेक्ट्रेट में आउटलेट्स हैं।
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डिजायनर बोले
डीआईसी डिजायनर रविशेखर का कहना है कि मूंज की घास से तैयार आभूषणों को हर तरह के पहनावे के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। ये आभूषण पारंपरिक परिधानों के साथ और भी ज्यादा जचते हैं।
मूंज से तैयार आभूषणों को आउटलेट्स पर बेचा जाएगा। पहले चरण में 15 आउटलेट्स शुरू होंगे। इससे मूंज की घास से आभूषण बनाने का प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा, साथ ही वे आत्मनिर्भर भी होंगी।
- सविन बंसल, डीएम नैनीताल
मूंज घास की विशेषता
मूंज का वानस्पतिक नाम सेक्करम मूंज है। यह गन्ना प्रजाति का पौधा है। यह नदियों के किनारे, सड़कों, रेलवे लाइनों, तालाबों, चरागाहों आदि के समीप स्वत: प्राकृतिक रूप से उग जाती है। मूंज की कटाई 10 से 12 फुट ऊंचाई की होने पर करनी चाहिए।

इसके बाद इसे पांच से आठ दिन सुखाया जाता है। सूखने के बाद कल्लों से फूल वाला भाग अलग कर लेना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे छप्पर, चारपाई, बीज साफ करने के लिए छाज, रस्सी और बच्चों का झूला बनाया जाता है।

मूंज की घास से तैयार आभूषण

मूंज की घास से तैयार आभूषण

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