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अमर उजाला अभियान : ऑनलाइन पढ़ाई ने विद्यार्थियों को लगा दी मोबाइल में गेम खेलने की लत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 11:24 PM IST
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Amar ujala Education Abhiyan in Nainital
Amar ujala Education Abhiyan in Nainital
नैनीताल। कोरोना संक्रमण के दौरान हुए लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई का माध्यम बने मोबाइल ने बच्चों को मोबाइल में गेम खेलने का लती बना दिया। पढ़ाई के साथ-साथ क्लास खत्म होने के बाद प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के कई विद्यार्थी मोबाइल में अलग-अलग गेम खेलने या फिर कार्टून फिल्में देखने में व्यस्त होने लगे। अधिकांश बच्चों की यह आदत स्कूल खुलने के बाद भी बनी हुई है। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है चूंकि अब सभी स्कूल खुल गए हैं और पढ़ाई भौतिक रूप से हो रही है लिहाजा ऐसे में बच्चों को मोबाइल न दें और यदि मोबाइल देना जरूरी है तो भी उन पर नजर बनाए रखें। इससे धीरे-धीरे बच्चों को मोबाइल से दूर किया जा सकता है।
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ऑनलाइन मोड में पढ़ाई से बच्चों में मोबाइल की लत लगना स्वाभाविक है। लेकिन अभिभावकों को चाहिए कि वह यह देखें कि बच्चे मोबाइल पर पढ़ाई कर रहे है या फिर गेम खेल रहे है। जब ऑनलाइन पढ़ाई का कार्य हो तभी बच्चों को मोबाइल उपलब्ध कराएं।
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- सावित्री दुग्ताल प्रधानाचार्या अटल उत्कृष्ट राबाइंका नैनीताल।
यह कहते हैं विद्यार्थी-
ऑनलाइन पढ़ाई में मन अधिक नहीं लगता था, इस दौरान कभी नेट की कनेक्टिविटी से जूझना होता था तो कभी अन्य दिक्कतों से। ऑफलाइन पढ़ाई में कोई भी विषय आसानी से समझ में आ जाता है। मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई के लिए किया जाए तो उससे लाभ मिलेगा, लेकिन मोबाइल फोन के नुकसान भी कई हैं।
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- तनिषा मेलकानी, छात्रा।
- कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प तो बेहतर मिला। लेकिन सीखने के नाम पर कुछ खास नहीं हुआ। अब नियमित कक्षाओं में उन्हें कई गतिविधियों से जोड़कर पढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई करते समय अधिकांश समय फोन में देखने से आंखों में दर्द महसूस होता था।
- अंजली चम्याल छात्रा।
यह बोले अभिभावक
- बच्चे ऑफलाइन कक्षा के बाद भी मोबाइल में लगे रहना पसंद कर रहे हैं। मोबाइल में लगने से आंखों पर इसका असर पड़ रहा है। साथ ही बच्चों की यह आदत बन चुकी है। इसे छुड़ाने के लिए बच्चों को घर से बाहर खेल गतिविधियों में व्यस्त रखना होगा।

- डॉ. पल्लवी रॉय गहतोड़ी, चिकित्सक व अभिभावक।
- मोबाइल में पढ़ाई करने से अब बच्चों को मोबाइल की लत लग चुकी है। स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वह छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों को बताएं, इसके साथ ही खेल व प्रतियोगिताएं कराएं ताकि बच्चे मोबाइल फोन से दूरी बना सकें।
- आरती बिष्ट, अभिभावक।
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