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मां गार्गी के तट पर एक मां ने किया अंतिम प्रयाण

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 02:09 AM IST
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A mother made her last sacrifice on the banks of Maa Gargi
हल्द्वानी। सोमवार को एक मां (इंदिरा हृदयेश) ने दूसरी मां (गार्गी नदी) के तट पर अंतिम प्रस्थान किया। सैकड़ों लोग अपनी मां, दीदी या रहनुमा के रूप में जानी जाने वाली डॉ. इंदिरा हृदयेश को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे थे। हर कोई स्तब्ध था और दुखी भी। विश्वास करना भी मुश्किल था कि यह सब कैसे हो गया। सबके पास यादों की पोटली में उनसे जुड़ी कोई न कोई बात और किस्सा था। हर किस्से में ममत्व, अपनत्व के साथ उनकी कुशलता, दक्षता और अनुभवों की बातें थीं।
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चित्रशिला घाट पर पहुंचे पूर्व सीएम हरीश रावत से बातों का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि जब वह सीएम थे तो घोषणा करके आ जाते थे। फिर तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश से कहते। तब वह कहतीं चिंता न करें। उनका (इंदिरा का) ऐसा वित्तीय प्रबंधन था कि व्यवस्था हो जाती थी। उनका निधन बड़ा आघात है। एक दिन पहले हमारे साथ बैठक कर कांग्रेस की वापसी की रणनीति बना रहीं थीं। वह हंसते-हंसाते सभी को उत्साहित कर रहीं थीं। उनके अंदर सभी को सहमत कराने की क्षमता थी। वह हमारी अघोषित कमांडर थीं। उनका राज्य के विकास में अहम योगदान है।
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उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने कहा कि एक दिन पहले तक उनसे चर्चा हो रही थी कि कैसे उत्तराखंड में कांग्रेस स्थापित हो। क्या नीतियां होनी चाहिए। कहां पर मीटिंग होनी चाहिए। वह हमेशा चिंता मनन करतीं थीं कि कैसे पार्टी और उत्तराखंड को आगे ले जाया जाए।
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गुड़ पापड़ी लेकर खूब खाने का सामान लाईं थीं, हम उसे उठाते थे
हल्द्वानी। सांसद अजय भट्ट कहते हैं कि 1998 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय आपदा प्रबंधन की जानकारी और संबंधित देशों के संविधान संबंधी जानकारी के लिए विधायकों का दल ऑस्ट्रेलिया, कनाडा समेत कई देशों की यात्रा पर गया था। उस दल में डॉ. इंदिरा हृदयेश भी थीं। वह अपने साथ गुड़ पापड़ी समेत अन्य सूखा पकवान लेकर आईं थीं। सामान ज्यादा था तो हम सभी उनका सामान उठाते थे। लखनऊ से कुमाऊं के लिए आती तो अक्सर शनिवार को। उन्हें पता था कि कुमाऊं का कोई न कोई विधायक या अन्य सहयात्री होगा, वह सभी के भोजन का ध्यान रखतीं थीं, साथ ही संसदीय ज्ञान के संबंध में भी जानकारी दिया करतीं थीं। सही मायने में वह आयरन लेडी थीं। सभी उनके गुणों के कायल थे।
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