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मुंह में आग रख, धरती पर उतरे देवता
Nainital
Updated Tue, 11 Feb 2014 05:44 AM IST
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हल्द्वानी। ढोल-नगाड़ों की तेज होती थाप के साथ सोमवार रात शहर की धरती पर ग्राम देवताओं का अवतार हुआ। पर्वतीय उत्थान मंच स्थित गोलज्यू मंदिर के आंगन पर देर रात तक देवता धूनी के चारों और नृत्य करते रहे। इससे पहले देवताओं को बुलाने के लिए करीब आधे घंटे तक बिरतवाई हुई। सभी तीर्थों और देवताओं का नाम लेने के बाद मुंह पर आग रखे गोलज्यू अवतार हुए। गोलज्यू के साथ उनकी सुरक्षा में दो अन्य देवता मसाड़ और कलुवा ने भी अवतार लिया। जागरिये के रूप में आनंद राम दास के साथ महेशराम दास, दिनेश आर्य, नारायण राम आर्य, हेम आर्य, हिमांशु आर्य और डंगरिये हरीश खाती, हरीश भट्ट, आचार्य कैलाश चंद्र भट्ट थे।
आसान नहीं देवताओं को बुलाना
डंगरियों के शरीर में देवता यूं ही अवतार नहीं होते। डंगरिये की साधना के अलावा जगरिया की आवाज और ढोल-दमाऊ की थाप भी अहम है। देवता को बुलाने की इस कला को बिरताई कहते हैं। बिरताई के दौरान देवता की जन्म गाथा गाकर उन्हें बुलाया जाता है।
पीढ़ियों से देवताओं को बुलाता परिवार
मूलरूप से जागेश्वर के रहने वाले आनंददास का परिवार पीढ़ियों से देवताओं को बुलाने का काम कर रहा है। आनंददास कहते हैं कि पूछताछ के लिए जागर कभी भी लगाई जा सकती है। इसके अलावा खुशी में भी जागर लगा सकते हैं। यह जागर नवरात्रों में लगती है।
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इन वाद्य यंत्रों की धुन पर आते हैं देवता
विजेसार का ढोल, तांबे की नंगरी, नगाड़ा, मशकबीन, झांझर, रणसिंह नाथ।
दो तरह से सुनते हैं भक्तों की समस्या
अवतार लेने वाले देवता दो तरह से भक्तों की समस्या सुनाते हैं। एक ही स्थान पर बैठने के अलावा धूनी के चारों तरफ नृत्य कर समस्याओं का निदान बताया जाता है।
हरीश खाती पर आते हैं पांच तरह के देवता
फतेहपुर के हरीश खाती पर 1996 में पहली बार देवता आया। उनके शरीर में पांच प्रकार देवता गोलू, सैम, हरज्यू, नारसिंह और भगवती अवतार लेती हैं। हरीश कहते हैं जब पहली-पहली बार उनके शरीर में देवता अवतार हुए थे तब उन्हें कष्ट हुआ था लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं होती।
अवतार के दौरान दुनिया से संपर्क नहीं रहता
मूलरूप से देवीधूरा के रहने वाले हरीश चंद्र भट्ट के शरीर में सात साल की उम्र से देवता अवतार लेते हैं गंगनाथ और गोलू जी। हरीश कहते हैं शुरुआत दौर में यह कष्टकारी होता था लेकिन अब देवता खुद ताकत देते हैं। अवतार के दौरान हमारा इस दुनिया से संपर्क नहीं रहता।
12 साल के हिमांशु के बुलाने पर आते हैं भगवान
12 साल का हिमांशु आनंददास का पुत्र है और आचार्य रवींद्र पब्लिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र। पीढ़ियों से चले आ रहे देवता को बुलाने का काम हिमांशु ने अभी से संभाल लिया है। वह पिछले पांच सालों से दमाऊ बजाकर देवताओं को भक्तों के दुख हरने के लिए बुला रहा है।
केवल गंगनाथ आते हैं हुड़के की थाप पर
अधिकांश लोक देवताओं को बुलाने के लिए ढोल-दमाऊ और नगाड़े बजाए जाते हैं। गंगनाथ अकेले से ऐसे देवता हैं जिन्हें बुलाने के लिए केवल हुड़का बजाया जाता है।
यह देवता लेते हैं अवतार
हरू, भनारी, लाटकुमार, बरू, उजलियारौताने, सियूरा-प्यूरा, सैमजी, माता भगवती, नारसिंह, भैरव, हनुमान, लकड़वीर, मसाड़, कलुवा मसाड़, एड़ी राजा, कालिका, गंगनाथ, झपरवा आदि। इसमें कई कुल देवता और कुछ ग्राम देवता हैं।
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आसान नहीं देवताओं को बुलाना
डंगरियों के शरीर में देवता यूं ही अवतार नहीं होते। डंगरिये की साधना के अलावा जगरिया की आवाज और ढोल-दमाऊ की थाप भी अहम है। देवता को बुलाने की इस कला को बिरताई कहते हैं। बिरताई के दौरान देवता की जन्म गाथा गाकर उन्हें बुलाया जाता है।
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पीढ़ियों से देवताओं को बुलाता परिवार
मूलरूप से जागेश्वर के रहने वाले आनंददास का परिवार पीढ़ियों से देवताओं को बुलाने का काम कर रहा है। आनंददास कहते हैं कि पूछताछ के लिए जागर कभी भी लगाई जा सकती है। इसके अलावा खुशी में भी जागर लगा सकते हैं। यह जागर नवरात्रों में लगती है।
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इन वाद्य यंत्रों की धुन पर आते हैं देवता
विजेसार का ढोल, तांबे की नंगरी, नगाड़ा, मशकबीन, झांझर, रणसिंह नाथ।
दो तरह से सुनते हैं भक्तों की समस्या
अवतार लेने वाले देवता दो तरह से भक्तों की समस्या सुनाते हैं। एक ही स्थान पर बैठने के अलावा धूनी के चारों तरफ नृत्य कर समस्याओं का निदान बताया जाता है।
हरीश खाती पर आते हैं पांच तरह के देवता
फतेहपुर के हरीश खाती पर 1996 में पहली बार देवता आया। उनके शरीर में पांच प्रकार देवता गोलू, सैम, हरज्यू, नारसिंह और भगवती अवतार लेती हैं। हरीश कहते हैं जब पहली-पहली बार उनके शरीर में देवता अवतार हुए थे तब उन्हें कष्ट हुआ था लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं होती।
अवतार के दौरान दुनिया से संपर्क नहीं रहता
मूलरूप से देवीधूरा के रहने वाले हरीश चंद्र भट्ट के शरीर में सात साल की उम्र से देवता अवतार लेते हैं गंगनाथ और गोलू जी। हरीश कहते हैं शुरुआत दौर में यह कष्टकारी होता था लेकिन अब देवता खुद ताकत देते हैं। अवतार के दौरान हमारा इस दुनिया से संपर्क नहीं रहता।
12 साल के हिमांशु के बुलाने पर आते हैं भगवान
12 साल का हिमांशु आनंददास का पुत्र है और आचार्य रवींद्र पब्लिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र। पीढ़ियों से चले आ रहे देवता को बुलाने का काम हिमांशु ने अभी से संभाल लिया है। वह पिछले पांच सालों से दमाऊ बजाकर देवताओं को भक्तों के दुख हरने के लिए बुला रहा है।
केवल गंगनाथ आते हैं हुड़के की थाप पर
अधिकांश लोक देवताओं को बुलाने के लिए ढोल-दमाऊ और नगाड़े बजाए जाते हैं। गंगनाथ अकेले से ऐसे देवता हैं जिन्हें बुलाने के लिए केवल हुड़का बजाया जाता है।
यह देवता लेते हैं अवतार
हरू, भनारी, लाटकुमार, बरू, उजलियारौताने, सियूरा-प्यूरा, सैमजी, माता भगवती, नारसिंह, भैरव, हनुमान, लकड़वीर, मसाड़, कलुवा मसाड़, एड़ी राजा, कालिका, गंगनाथ, झपरवा आदि। इसमें कई कुल देवता और कुछ ग्राम देवता हैं।