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बगल में छोरा, नगर में ढिंढोरा
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:46 AM IST
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हल्द्वानी। वही कहावत है कि बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा यानी जब हल्द्वानी में जैव चिकित्सीय कचरा निस्तारण प्लांट लगा है तो फिर उसमें निस्तारण कराने को लेकर प्रशासन कोई रास्ता क्यों नहीं निकाल रहा। राजकीय मेडिकल कॉलेज के स्वामी राम कैंसर अस्पताल परिसर में स्थापित इन्सीनेटर क्षमता के अनुरूप कचरा मिल ही नहीं पाता।
जानकारी के अनुसार स्वयंसेवी संस्था ‘पहल’ द्वारा निजी अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सीय कचरे को निस्तारित करने का काम किया जाता था। यह संस्था जैव चिकित्सीय कचरा अस्पतालों से एकत्र कर यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित स्वामी राम तीर्थ कैंसर अस्पताल के परिसर में लगे इन्सीनेटर में लाती थी जहां इसका निस्तारण हो जाता था। बताते हैं कि वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2013 तक इस संस्था द्वारा जैव चिकित्सीय कचरे को निस्तारित करने का काम किया गया। इसी बीच किसी के द्वारा मेडिकल कालेज के इन्सीनेटर में निजी अस्पतालों का जैव कचरा निस्तारण होने पर सवाल उठा दिया गया, इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेडिकल कॉलेज के इन्सीनेटर में निजी अस्पतालों के जैव कचरे के निस्तारण पर रोक लगा दी। एक निजी अस्पताल के संचालक भी बताते हैं कि 28 अक्तूबर 2009 से लेकर 28 फरवरी 2013 तक उनके अस्पताल से भी ‘पहल’ संस्था द्वारा जैव चिकित्सीय कचरा उठाया गया, लेकिन कभी कोई समस्या पैदा नहीं हुई। निजी अस्पताल संचालक का यही कहना था कि जब जैव चिकित्सीय कचरे का निस्तारण आसानी से यहीं मेडिकल कालेज के इन्सीनेटर में हो सकता है तो कहीं ओर भेजने की क्या जरूरत है। व्यापारी नेता नवीन वर्मा भी बताते हैं कि उनके छोटे भाई द्वारा स्वयं सेवी संस्था पहल के माध्यम से जैव चिकित्सीय कचरे को एकत्र कर निस्तारित कराने का काम किया जाता था लेकिन बाद में यह कार्य किसी और को दे दिया गया।
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जानकारी के अनुसार स्वयंसेवी संस्था ‘पहल’ द्वारा निजी अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सीय कचरे को निस्तारित करने का काम किया जाता था। यह संस्था जैव चिकित्सीय कचरा अस्पतालों से एकत्र कर यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित स्वामी राम तीर्थ कैंसर अस्पताल के परिसर में लगे इन्सीनेटर में लाती थी जहां इसका निस्तारण हो जाता था। बताते हैं कि वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2013 तक इस संस्था द्वारा जैव चिकित्सीय कचरे को निस्तारित करने का काम किया गया। इसी बीच किसी के द्वारा मेडिकल कालेज के इन्सीनेटर में निजी अस्पतालों का जैव कचरा निस्तारण होने पर सवाल उठा दिया गया, इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेडिकल कॉलेज के इन्सीनेटर में निजी अस्पतालों के जैव कचरे के निस्तारण पर रोक लगा दी। एक निजी अस्पताल के संचालक भी बताते हैं कि 28 अक्तूबर 2009 से लेकर 28 फरवरी 2013 तक उनके अस्पताल से भी ‘पहल’ संस्था द्वारा जैव चिकित्सीय कचरा उठाया गया, लेकिन कभी कोई समस्या पैदा नहीं हुई। निजी अस्पताल संचालक का यही कहना था कि जब जैव चिकित्सीय कचरे का निस्तारण आसानी से यहीं मेडिकल कालेज के इन्सीनेटर में हो सकता है तो कहीं ओर भेजने की क्या जरूरत है। व्यापारी नेता नवीन वर्मा भी बताते हैं कि उनके छोटे भाई द्वारा स्वयं सेवी संस्था पहल के माध्यम से जैव चिकित्सीय कचरे को एकत्र कर निस्तारित कराने का काम किया जाता था लेकिन बाद में यह कार्य किसी और को दे दिया गया।
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