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यात्रा पूरी कर लौटे दो दलों के 62 कैलाश यात्री
Updated Mon, 03 Sep 2018 02:01 AM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे कर्नाटक के सनमुखप्पा सिदलीपुरा अरियप्पा (65) और उनकी पत्नी शकुंतला (57) ने बताया कि बहू डॉ. रश्मि और बेटे डॉ. मोहन ने उन्हें कैलाश मानसरोवर यात्रा करने के लिए प्रेरित किया। पहली बार यात्रा पर जा रहे इस दंपति ने बताया कि उन्हें हिंदी नहीं आती। अंग्रेजी नहीं जानने वाले सहयात्रियों से बात नहीं कर पा रहे हैं लेकिन यात्रा को लेकर उनमें उत्साह है।
बचपन से था कैलाश यात्रा का सपना
हल्द्वानी। उत्तराखंड के रुड़की निवासी हर्ष सहदेव (29) भी कैलाश यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में स्कूल में एक नाटक में एक बार उन्होंने भगवान शिव का अभिनय किया। तभी से वह बाबा के भक्त बन गए और मन में ठान लिया कि एक बार कैलाश यात्रा जरूर करूंगा। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यात्रा नहीं कर सके। इंटर की पढ़ाई के बाद नगर के डीपीएस स्कूल में कोआर्डिनेटर के पद पर नियुक्ति मिल गई। कैलाश यात्रा के लिए पैसे जमा किए। इस बार आवेदन किया तो उन्हें यात्रा करने का मौका भी मिल गया।
यात्रा पूरी कर लौटे कैलाश यात्रा के 62 यात्री
हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर दो दलों के 62 यात्री मानसरोवर परिक्रमा पूरी कर लौट आए हैं। यात्रा पूरी कर लौटे यात्रियों में 22 यात्री 11 वें और 40 यात्री 13 वें दल के शामिल हैं। यात्री देर रात कुमाऊं मंडल विकास निगम के काठगोदाम स्थित पर्यटक आवास गृह में पहुंचे, जहां भोजन के बाद दिल्ली को रवाना हो गए।
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टीआरसी काठगोदाम के प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए 12 वें दल के यात्री पहले ही वापस दिल्ली चले गए हैं। 11 वें दल के 22 यात्रियों समेत 13 वें दल के 40 यात्री आज गुंजी से हेलीकाप्टर से पिथौरागढ़ पहुंचे। वहां से बस से सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
अभी 13 वें दल के 15 यात्रियों समेत 14 वें दल के 38, 15 वें दल के 58 और 16 वें दल के 57 यात्री गुंजी में हैं। इनमें से 16 वें दल के यात्री कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा को जा रहे हैं जबकि अन्य यात्री मानसरोवर परिक्रमा कर वापस आ रहे हैं। इस समय कैलाश परिक्रमा पर या तिब्बती क्षेत्र में कोई यात्री दल नहीं है। 16 वें यात्री दल के सदस्य सोमवार को कैलाश यात्रा के लिए रवाना होंगे। पांडे ने बताया कि तय शेड्यूल के मुताबिक 8 सितंबर को 18 वें दल के यात्रियों के वापस आने के साथ ही यात्रा पूरी हो जानी चाहिए थी लेकिन मौसम की खराबी के कारण सभी यात्री दल मार्ग में फंसे रहे। जिस वजह से दिल्ली से ही 14 वें दल के बाद यात्रा रोक दी गई थी। बाद में विदेश मंत्रालय की चाइना सरकार से वार्ता के बाद शेष चार दलों की यात्रा की अनुमति दी गई।
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बचपन से था कैलाश यात्रा का सपना
हल्द्वानी। उत्तराखंड के रुड़की निवासी हर्ष सहदेव (29) भी कैलाश यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में स्कूल में एक नाटक में एक बार उन्होंने भगवान शिव का अभिनय किया। तभी से वह बाबा के भक्त बन गए और मन में ठान लिया कि एक बार कैलाश यात्रा जरूर करूंगा। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यात्रा नहीं कर सके। इंटर की पढ़ाई के बाद नगर के डीपीएस स्कूल में कोआर्डिनेटर के पद पर नियुक्ति मिल गई। कैलाश यात्रा के लिए पैसे जमा किए। इस बार आवेदन किया तो उन्हें यात्रा करने का मौका भी मिल गया।
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यात्रा पूरी कर लौटे कैलाश यात्रा के 62 यात्री
हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर दो दलों के 62 यात्री मानसरोवर परिक्रमा पूरी कर लौट आए हैं। यात्रा पूरी कर लौटे यात्रियों में 22 यात्री 11 वें और 40 यात्री 13 वें दल के शामिल हैं। यात्री देर रात कुमाऊं मंडल विकास निगम के काठगोदाम स्थित पर्यटक आवास गृह में पहुंचे, जहां भोजन के बाद दिल्ली को रवाना हो गए।
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टीआरसी काठगोदाम के प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए 12 वें दल के यात्री पहले ही वापस दिल्ली चले गए हैं। 11 वें दल के 22 यात्रियों समेत 13 वें दल के 40 यात्री आज गुंजी से हेलीकाप्टर से पिथौरागढ़ पहुंचे। वहां से बस से सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
अभी 13 वें दल के 15 यात्रियों समेत 14 वें दल के 38, 15 वें दल के 58 और 16 वें दल के 57 यात्री गुंजी में हैं। इनमें से 16 वें दल के यात्री कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा को जा रहे हैं जबकि अन्य यात्री मानसरोवर परिक्रमा कर वापस आ रहे हैं। इस समय कैलाश परिक्रमा पर या तिब्बती क्षेत्र में कोई यात्री दल नहीं है। 16 वें यात्री दल के सदस्य सोमवार को कैलाश यात्रा के लिए रवाना होंगे। पांडे ने बताया कि तय शेड्यूल के मुताबिक 8 सितंबर को 18 वें दल के यात्रियों के वापस आने के साथ ही यात्रा पूरी हो जानी चाहिए थी लेकिन मौसम की खराबी के कारण सभी यात्री दल मार्ग में फंसे रहे। जिस वजह से दिल्ली से ही 14 वें दल के बाद यात्रा रोक दी गई थी। बाद में विदेश मंत्रालय की चाइना सरकार से वार्ता के बाद शेष चार दलों की यात्रा की अनुमति दी गई।