{"_id":"5ad500554f1c1b46098b4ef6","slug":"151523908693-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुमाऊं विवि का छात्रों को झटका, पांच हजार हुआ प्रयोगात्मक शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुमाऊं विवि का छात्रों को झटका, पांच हजार हुआ प्रयोगात्मक शुल्क
Updated Tue, 17 Apr 2018 02:05 AM IST
विज्ञापन
भारतीय करंसी
हल्द्वानी। योगेश चंद्र पलड़िया की बीएससी प्रथम सेमेस्टर में वनस्पति विज्ञान और जंतुविज्ञान विषय में प्रयोगात्मक परीक्षा छूट गई थी। अब प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के विश्वविद्यालय प्रति विषय पांच-पांच हजार रुपये और आंतरिक मूल्यांकन के नंबर चढ़वाने के प्रति विषय एक-एक हजार, कुल 12 हजार रुपये मांग रहा है। ऐसा कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से सेमेस्टर प्रणाली में प्रयोगात्मक शुल्क बढ़ाने से हुआ है।
स्नातक स्तर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय ने वर्ष 2016 में सेमेस्टर प्रणाली लागू की थी। उस समय सेमेस्टर प्रणाली व्यवस्था में प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने पर उसका शुल्क पूर्व की भांति मात्र दो हजार रुपये ही रखा गया था। लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेतहाशा वृद्धि कर दी। प्रयोगात्मक परीक्षा होने के 30 दिन के अंदर शुल्क दो हजार पड़ेगा तथा यह समय निकलने पर प्रति विषय पांच हजार शुल्क लगेगा। इसी तरह आंतरिक मूल्यांकन शुल्क भी 500 रुपये था इसे बढ़ाकर सीधे एक हजार किया गया है।
नया आदेश
अगर कोई छात्र सेमेस्टर परीक्षा के समय प्रयोगात्मक परीक्षा देने से छूट गया तो उसे पांच-पांच हजार प्रति विषय प्रयोगात्मक परीक्षा शुल्क विश्वविद्यालय को देना होगा, उसके बाद ही विश्वविद्यालय छूटी प्रयोगात्मक परीक्षा कराएगा। इसी तरह एसाइनमेंट जमा नहीं किए तो उसके आंतरिक मूल्यांकन के नंबर चढ़वाने के लिए प्रति विषय एक-एक हजार रुपये देने होंगे।
विज्ञापन
प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने से प्रभावित कई विद्यार्थी महाविद्यालय आ रहे हैं। छात्रों की समस्या है कि पांच-पांच हजार प्रति विषय प्रयोगात्मक शुल्क मांगे जाने पर वह 12 हजार तक शुल्क कहां से जमा करेंगे। इससे कई छात्र परेशान हैं।
- डॉ. विनय विद्यालंकार, चीफ प्रॉक्टर
विज्ञापन
स्नातक स्तर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय ने वर्ष 2016 में सेमेस्टर प्रणाली लागू की थी। उस समय सेमेस्टर प्रणाली व्यवस्था में प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने पर उसका शुल्क पूर्व की भांति मात्र दो हजार रुपये ही रखा गया था। लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेतहाशा वृद्धि कर दी। प्रयोगात्मक परीक्षा होने के 30 दिन के अंदर शुल्क दो हजार पड़ेगा तथा यह समय निकलने पर प्रति विषय पांच हजार शुल्क लगेगा। इसी तरह आंतरिक मूल्यांकन शुल्क भी 500 रुपये था इसे बढ़ाकर सीधे एक हजार किया गया है।
विज्ञापन
नया आदेश
अगर कोई छात्र सेमेस्टर परीक्षा के समय प्रयोगात्मक परीक्षा देने से छूट गया तो उसे पांच-पांच हजार प्रति विषय प्रयोगात्मक परीक्षा शुल्क विश्वविद्यालय को देना होगा, उसके बाद ही विश्वविद्यालय छूटी प्रयोगात्मक परीक्षा कराएगा। इसी तरह एसाइनमेंट जमा नहीं किए तो उसके आंतरिक मूल्यांकन के नंबर चढ़वाने के लिए प्रति विषय एक-एक हजार रुपये देने होंगे।
विज्ञापन
प्रयोगात्मक परीक्षा छूटने से प्रभावित कई विद्यार्थी महाविद्यालय आ रहे हैं। छात्रों की समस्या है कि पांच-पांच हजार प्रति विषय प्रयोगात्मक शुल्क मांगे जाने पर वह 12 हजार तक शुल्क कहां से जमा करेंगे। इससे कई छात्र परेशान हैं।
- डॉ. विनय विद्यालंकार, चीफ प्रॉक्टर