बस की बॉडी काटने तक को कटर नहीं
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धुमाकोट बस हादसे ने पौड़ी जिले में आपदा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के पास राहत और बचाव कार्य चलाने के लिए मात्र कुछ ही स्ट्रेचर मौजूद थे। बस के नीचे से शव निकालने के लिए जब कटर की जरूरत पड़ी तो अधिकारी कर्मचारी एक दूसरे का मुंह देखने लगे। आपदा प्रबंधन की कमजोर हालत पर क्षेत्रीय विधायक दलीप रावत ने प्रशासन की जमकर खिंचाई की। विधायक की मानें तो उन्होंने घायलों की स्थिति देखकर गढ़वाल सांसद बीसी खंडूड़ी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। गढ़वाल सांसद ने राजभवन को मामले की जानकारी दी और मदद के लिए हेलीकाप्टर भेजने का आग्रह किया।
ग्रामीणों का कहना था कि घटनास्थल के पास स्थित धुमाकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। डॉक्टर न होने के कारण घायलों को 108 की मदद से तेरह किमी दूर नैनीडांडा सामुदायिक अस्पताल ले जाया गया। वहां भी संसाधनों की कमी से अस्पताल प्रशासन लाचार नजर आया। घायलों के एक्सरे तक नहीं हो पाए। मरहम पट्टी के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ा। धुमाकोट के एसडीएम अनिल गर्ब्याल अवकाश पर हैं। जिलाधिकारी चंद्रशेखर भट्ट ने थलीसैंण के एसडीएम मायादत्त जोशी को घटनास्थल के लिए रवाना किया, जिन्हें धुमाकोट पहुंचने में समय लग गया।
धुमाकोट थाने में तैनात ज्यादातर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी अर्द्धकुंभ में लगने के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेस्क्यू कार्य ग्रामीणों के भरोसे चला। देर शाम घटनास्थल पर पहुंचे जिलाधिकारी चंद्रशेखर भट्ट ने कटर की व्यवस्था कर बस के नीचे दबे एक शव को निकलवाया। देर शाम तक राहत और बचाव कार्य जारी था। हालांकि, अंधेरा होने के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही थी।