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सरकारी स्कूलों में दिलाने होंगे दाखिले
ब्यूरो/ अमर उजाला,कोटद्वार
Updated Thu, 28 Apr 2016 09:04 PM IST
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स्वराज अभियान के तहत निकाली जा रही शिक्षा स्वराज यात्रा की संयोजिका कमला पंत ने कहा कि उनकी यात्रा का मकसद हर उस व्यक्ति के बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाना है जो किसी न किसी रूप से सरकारी धन का इस्तेमाल कर रहा है। इससे समान व सार्थक शिक्षा को स्थापित किया जा सकेगा।
बृहस्पतिवार को महिला सामाख्या कार्यालय में पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि उनकी यह यात्रा देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी जिले के विभिन्न स्थानों से होकर यहां पहुंची है। सभी जगह लोगों का व्यापक समर्थन मिला है। कहा कि शिक्षा के नाम पर प्राइवेट स्कूलों में लूट मची है। इस पर राजनीतिक दलों की चुप्पी पर उन्होंने हैरत जताई। कहा कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कानून बनाने के लिए सरकारें आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी।
तीसरे विकल्प का दावा करने वाले दल भी समान शिक्षा व शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ कोई आंदोलन खड़ा करने में कामयाब नहीं हो सके। कहा कि एक तरफ सरकार दावा करती है कि वह सरकारी विद्यालयों में उच्चतम शिक्षा के मानकों का संचालन कर रही है, वहीं सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में दाखिला दिला रहे हैं। इससे असमान शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। इसलिए स्वराज अभियान व समर्थक जनसंगठनों ने शिक्षा के सवाल को जनता का सर्वप्रमुख मुद्दा मानकर राज्यव्यापी संघर्ष खड़ा करने का निर्णय लिया है।
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कहा कि उनका आंदोलन निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ कानून बनने के बाद ही थमेगा। इस अवसर पर उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, किसान स्वराज के राजीव कुमार, राज्य निर्माण सेनानी संघ के जबर सिंह पावेल, मनोज ध्यानी, पदमा गुप्ता, आकाश भारतीय, वीना सकलानी, एनएन पांडे, शोभित मोहन, तुषार रावत, राजीव कुमार आदि मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार को महिला सामाख्या कार्यालय में पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि उनकी यह यात्रा देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी जिले के विभिन्न स्थानों से होकर यहां पहुंची है। सभी जगह लोगों का व्यापक समर्थन मिला है। कहा कि शिक्षा के नाम पर प्राइवेट स्कूलों में लूट मची है। इस पर राजनीतिक दलों की चुप्पी पर उन्होंने हैरत जताई। कहा कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कानून बनाने के लिए सरकारें आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी।
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तीसरे विकल्प का दावा करने वाले दल भी समान शिक्षा व शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ कोई आंदोलन खड़ा करने में कामयाब नहीं हो सके। कहा कि एक तरफ सरकार दावा करती है कि वह सरकारी विद्यालयों में उच्चतम शिक्षा के मानकों का संचालन कर रही है, वहीं सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में दाखिला दिला रहे हैं। इससे असमान शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। इसलिए स्वराज अभियान व समर्थक जनसंगठनों ने शिक्षा के सवाल को जनता का सर्वप्रमुख मुद्दा मानकर राज्यव्यापी संघर्ष खड़ा करने का निर्णय लिया है।
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कहा कि उनका आंदोलन निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ कानून बनने के बाद ही थमेगा। इस अवसर पर उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, किसान स्वराज के राजीव कुमार, राज्य निर्माण सेनानी संघ के जबर सिंह पावेल, मनोज ध्यानी, पदमा गुप्ता, आकाश भारतीय, वीना सकलानी, एनएन पांडे, शोभित मोहन, तुषार रावत, राजीव कुमार आदि मौजूद थे।