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केदारघाटी में आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित
श्रीनगर
Updated Thu, 14 Jan 2016 05:08 PM IST
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केदारघाटी में होने वाली हलचल के अध्ययन के लिए नार्वे सरकार आगे आई है। नार्वे के नार्वेयिन जियोटेक्निक इंस्टीट्यूट के आर्थिक सहयोग से केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (डीएसटी) और केंद्रीय विवि श्रीनगर के भूविज्ञान विभाग ने कालीमठ में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किया है। खास बात यह है कि वेब कैमरे से यहां हर पल मौसम में हो रहे बदलाव को रिकार्ड किया जा रहा है।
गांधी सरोवर (चोराबाड़ी) में वाडिया संस्थान का आटोमेटिक वेदर स्टेशन 15/16 जून 2013 की भारी बारिश में बह गया था। इसके बाद से यहां सरकार की ओर से मौसम का विश्लेषण करने के लिए कोई पुख्ता संसाधन नहीं जुटाए गए हैं। वहीं, केंद्रीय विवि श्रीनगर के भूविज्ञान विभाग ने नार्वेयिन जियोटेक्निक इंस्टीट्यूट की मदद से अक्तूबर में कालीमठ में वेदर स्टेशन स्थापित किया गया। स्टेशन में वेब कैमरा, रेनफॉल गेज, वायुदाब मापी और मृदा नमीमापी सेंसर (सोइल मॉयस्चर सेंसर) लगाए गए हैं।
भूविज्ञानी प्रो. यशपाल सुंद्रियाल ने बताया कि वेब कैमरे से कालीमठ के सामने पहाड़ी पर नजर रखी जा रही है। साथ ही वातारण में नमी, बारिश, मिट्टी में नमी और हवा के दबाव आदि रिकार्ड दर्ज किए जा रहे हैं। केंद्र के जरिये भूस्खलन और भूधंसाव का अध्ययन हो रहा है। कहा कि वैज्ञानिकों के पास डाटा उपलब्ध रहने से भूस्खलन की घटनाओं का पूर्वानुमान करने में आसानी होगी।
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डाटा सिर्फ देश में
श्रीनगर। भले ही वेदर स्टेशन स्थापित करने का खर्चा नार्वे के संस्थान ने किया हो, लेकिन इसका डाटा सिर्फ डीएसटी और भूविज्ञान विभाग गढ़वाल विवि श्रीनगर को उपलब्ध हो रहा है।
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गांधी सरोवर (चोराबाड़ी) में वाडिया संस्थान का आटोमेटिक वेदर स्टेशन 15/16 जून 2013 की भारी बारिश में बह गया था। इसके बाद से यहां सरकार की ओर से मौसम का विश्लेषण करने के लिए कोई पुख्ता संसाधन नहीं जुटाए गए हैं। वहीं, केंद्रीय विवि श्रीनगर के भूविज्ञान विभाग ने नार्वेयिन जियोटेक्निक इंस्टीट्यूट की मदद से अक्तूबर में कालीमठ में वेदर स्टेशन स्थापित किया गया। स्टेशन में वेब कैमरा, रेनफॉल गेज, वायुदाब मापी और मृदा नमीमापी सेंसर (सोइल मॉयस्चर सेंसर) लगाए गए हैं।
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भूविज्ञानी प्रो. यशपाल सुंद्रियाल ने बताया कि वेब कैमरे से कालीमठ के सामने पहाड़ी पर नजर रखी जा रही है। साथ ही वातारण में नमी, बारिश, मिट्टी में नमी और हवा के दबाव आदि रिकार्ड दर्ज किए जा रहे हैं। केंद्र के जरिये भूस्खलन और भूधंसाव का अध्ययन हो रहा है। कहा कि वैज्ञानिकों के पास डाटा उपलब्ध रहने से भूस्खलन की घटनाओं का पूर्वानुमान करने में आसानी होगी।
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डाटा सिर्फ देश में
श्रीनगर। भले ही वेदर स्टेशन स्थापित करने का खर्चा नार्वे के संस्थान ने किया हो, लेकिन इसका डाटा सिर्फ डीएसटी और भूविज्ञान विभाग गढ़वाल विवि श्रीनगर को उपलब्ध हो रहा है।