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Kotdwar News: उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों का कोटद्वार में पहुंचते ही बदहाली से होता है सामना

Tue, 05 Nov 2024 10:41 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2024 10:41 PM IST
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Tourists coming to Uttarakhand face bad conditions as soon as they reach Kotdwar.

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कोटद्वार। प्रगति की ओर बढ़ते कदम का दावा करने वाली उत्तराखंड सरकार के कदम कोटद्वार में उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश सीमा पर पड़ें, तो हकीकत का पता चले। उत्तर प्रदेश सरकार ने नजीबाबाद तहसील मुख्यालय से 22 किलोमीटर तक 1.32 करोड़ रुपये के बजट से भव्य और आकर्षक स्वागत द्वार का निर्माण कराया है, जबकि कोटद्वार में पर्यटकों का सामना सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हुए वाहन, कबाड़ बन रहे सीज किए वाहन और कूड़े के ढेर से हो रहा है।
उत्तराखंड राज्य स्थापना के समय यूपी-उत्तराखंड की सीमा तय करने के बाद एक गेट बनाया गया था, जिसे हेमवती नंदन बहुगुणा द्वार नाम दिया गया था। इस गेट पर बिजली का कनेक्शन नहीं हो पाया है। दिन ढलने पर यहां अंधेरा छा जाता है। सीमा पर निगरानी के लिए स्वागत द्वार से सटे खंभे पर पुलिस के नाइट विजन वाले सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं, लेकिन लाइन की व्यवस्था नहीं है। सफाई और देखरेख के अभाव में पत्थर पर नक्काशी भी धूमिल होने लगी है।
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वहीं, कोटद्वार क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त होने वाले वाहनों को कई वर्षों से स्वागत द्वार क्षेत्र में ही हाईवे किनारे लाकर डाला जा रहा है। इनमें कई वाहनों की हालत इतनी खराब है कि कोटद्वार पहुंचने वाले लोग इन्हें देखकर सहम जाते हैं। कोटद्वार में सीज किए जाने वाले वाहनों को भी यहीं लाकर छोड़ दिया जाता है। कई वाहन कबाड़ होने की कगार पर हैं। ट्रॉलियों में भरी रेत-बजरी में झाड़ियां उग चुकी हैं। टायर गल चुके हैं। इतना ही नहीं स्वागत द्वार के नजदीक सड़क किनारे कूड़ा डालने से दुर्गंध का वातावरण है।
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स्वागत द्वार बनाने वाली संस्था की ओर से इसे नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया और इसकी मरम्मत के लिए कोई बजट भी उपलब्ध नही है। -वैभव गुप्ता, नगर आयुक्त, कोटद्वार




दुर्घटनाग्रस्त एवं सीज किए वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से डिमांड की गई है। -जया बलोनी, अपर पुलिस अधीक्षक पौड़ी
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