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छावनी नगर में तीन सौ चाल-खाल का होगा निर्माण

Mon, 04 Apr 2016 09:45 PM IST
अमर उजाला/लैंसडौन।
अमर उजाला/लैंसडौन। Updated Mon, 04 Apr 2016 09:45 PM IST
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Three hundred pond will build
चाल-खाल योजना की शुरुआत करते हुए। - फोटो : अमर उजाला

वर्षा जल संरक्षण का अधिकतम उपयोग पेयजल के लिए सुनिश्चित करने और पर्वतीय क्षेत्रों में पानी के स्तर को बनाए रखने के लिए चाल-खाल योजना को क्रियान्वित करने की दिशा में छावनी परिषद ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।

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योजना को धरातल पर उतारने के लिए पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती के अनुभवों का लाभ उठाते हुए सोमवार को धोबीघाट के निकट चाल-खाल योजना की शुरुआत की गई। योजना के बारे में पर्यावरणविद भारती ने बताया कि कैंट बोर्ड की दस हेक्टेयर ढालदार भूमि को चिह्नित कर तीन सौ चाल-खाल बनाए जाने की योजना है। इस योजना के तहत चाल-खालों से 10 लाख लीटर पानी उपलब्ध हो सकेगा। इससे कई वर्षों से नगर में चला आ रहा पेयजल संकट हल हो सकेगा। सूख रहे जलस्रोतों के रिचार्ज जोन के उपचार हेतु कार्ययोजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन से जल संकट हल हो सकेगा।
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तीन जलस्रोतों में हो रही पानी की कमी
लैंसडौन नगर में तीन महत्वपूर्ण जलस्रोत पठानकोट, बंशीघाट और धोबीघाट हैं जहां पानी की कमी होती जा रही है। यदि यही स्थिति कायम रही तो इससे जल संकट गहराता जाएगा। जल संकट के हल के लिए संबंधित जल स्रोतों में पानी की मात्रा बढ़ाने के लिए इन रिचार्ज जोनों के उपचार का काम चालू किया गया हैै। इसके लिए चाल-खालों को जीवित किया जा रहा है। योजना के तहत जल समेत क्षेत्रों का उपचार करने के साथ ही सूख रहे पेयजल रिचार्ज होंगे। इस काम में मिट्टी, पेड़, एक प्रकार की विशेष घास कुकई का प्रयोग किया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार की प्लास्टिक व सीमेंट का प्रयोग नहीं होगा।
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भारती ने बताया कि नगर की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति होने के कारण यहां के जल स्रोत उथले हैं। इनमें ज्यादा से ज्यादा पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए जगह-जगह चौड़ी पत्ती वाले बांज, उत्तीस और गढ़ पीपल के वृक्ष भी लगाए जाने की योजना है।

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