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दुराचार के आरोपी को दस साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, पौड़ी
Updated Thu, 28 Apr 2016 09:12 PM IST
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन ने नवंबर 2014 में कोटद्वार तहसील क्षेत्र में दुराचार के एक मामले में आरोपी को दस साल की सजा और दस हजार के जुर्माने से दंडित किया है। मामले में न्यायालय ने प्रदेश सरकार को भी पीड़िता को एक लाख का विशेष मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला एवं शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया कि एक नवंबर 2011 में कोटद्वार तहसील क्षेत्र में कक्षा तीन में पढ़ने वाली आठ वर्षीय बच्ची के साथ दुराचार की घटना हुई थी। पीड़िता की मां ने घटना के दिन ही रात को पुलिस को तहरीर देकर कोटद्वार क्षेत्र निवासी मंदीप सिंह पुत्र दयाल सिंह पर दुराचार का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि घटना के दिन शाम पांच बजे आरोपी ने बच्ची को नमकीन देकर कमरे में बुलाया और वहां उसके साथ दुराचार किया। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर वह वहां पहुंची तो आरोपी मौके से फरार हो गया। पीड़िता की मां की ओर दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 और पोक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
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शासकीय अधिवक्ता नेगी बताया कि न्यायालय ने आरोपी को धारा 376 में दस साल की सजा, पांच हजार का जुर्माना एवं पोक्सो अधिनियम में दस साल की सजा और पांच हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। कोर्ट ने मामले में प्रदेश सरकार को भी आदेश दिए कि वह पीड़िता को एक लाख रुपये का विशेष मुआवजा दे।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला एवं शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया कि एक नवंबर 2011 में कोटद्वार तहसील क्षेत्र में कक्षा तीन में पढ़ने वाली आठ वर्षीय बच्ची के साथ दुराचार की घटना हुई थी। पीड़िता की मां ने घटना के दिन ही रात को पुलिस को तहरीर देकर कोटद्वार क्षेत्र निवासी मंदीप सिंह पुत्र दयाल सिंह पर दुराचार का आरोप लगाया था।
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उन्होंने कहा कि घटना के दिन शाम पांच बजे आरोपी ने बच्ची को नमकीन देकर कमरे में बुलाया और वहां उसके साथ दुराचार किया। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर वह वहां पहुंची तो आरोपी मौके से फरार हो गया। पीड़िता की मां की ओर दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 और पोक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
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शासकीय अधिवक्ता नेगी बताया कि न्यायालय ने आरोपी को धारा 376 में दस साल की सजा, पांच हजार का जुर्माना एवं पोक्सो अधिनियम में दस साल की सजा और पांच हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। कोर्ट ने मामले में प्रदेश सरकार को भी आदेश दिए कि वह पीड़िता को एक लाख रुपये का विशेष मुआवजा दे।