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मेंढक की संख्या हो रही कम

Mon, 25 Apr 2016 10:22 PM IST
अमर उजाला, श्रीनगर
अमर उजाला, श्रीनगर Updated Mon, 25 Apr 2016 10:22 PM IST
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डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के वाहक मच्छरों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाने वाले मेंढक (स्प्रिरोथिका बेरविसेप्स) की संख्या कम होती जा रही है। अंधाधुध भवन निर्माण और खनन कार्य इस जैविक कीटनाशक (बायोलॉजिकल पेस्ट) के लिए काल बन रहे हैं। मिट्टी में डेढ़ फीट अंदर रहने वाले इस मेंढक का प्राकृतिक आवास खुदान से तहस-नहस हो रहा है।  
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केंद्रीय गढ़वाल विवि के जंतु विज्ञान के प्रो. एसएन बहुगुणा और शोध छात्र आशीष चौधरी व विवेक बहुगुणा की टीम ने तीन वर्ष के शोध के आधार पर यह नतीजे निकाले हैं। ऐसे में इस मेंढक के संरक्षण पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। ऐसा न हो कि मानव प्रजाति के लिए उपयोगी मेंढक विलुप्त हो जाए।
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जमीन में डेढ़ फीट तक की गहराई में रहने वाला  स्प्रिरोथिका बेरविसेप्स रात्रिचर प्राणी है। यह सिर्फ प्रजनन और भोजन के लिए मानसून काल में मिट्टी से बाहर निकलता है। बरसात के दौरान मच्छर, मच्छरों के लार्वा, टिड्डे, बीटल्स, कनखजूरा, चींटी, दीमक और मकड़ी बहुतायत में होते हैं। यह मेंढक इन कीटों का चट कर जाता है।
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शोधार्थी आशीष चौधरी बताते हैं कि उन्होंने तीन वर्षों तक श्रीनगर, चौरास, रुदप्रयाग, चमोली, जोशीमठ और देहरादून समेत अन्य स्थानों में उन्होंने डेटा एकत्रित हुए। तीन साल तक अध्ययन के दौरान यह देखा गया कि मेंढकों की संख्या  तेजी से गिरी है। वर्ष 2013 में जिस स्थान पर 50 से अधिक मेंढक देखे गए थे। उस स्थान पर मात्र 9-10 मेंढक दिखाई दिए। मेंढकों के प्राकृतिक आवास वाले स्थानों में तेजी से भवन निर्माण होने से इनकी संख्या घटी है। मकान बनाते समय नींव खुदाई होने से उनके आवास खत्म हो रहे हैं। खनन में भी ऐसा ही है। देहरादून जैसे स्थान में इसका व्यापक प्रभाव देखा गया है।

सबसे अधिक मच्छर के अवशेष
श्रीनगर। शोध छात्र आशीष चौधरी ने तीन साल तक समुद्र तल से 550 मीटर से 1780 मीटर की ऊंचाई तक स्प्रिरोथिका बेरविसेप्स प्रजाति के मेंढक के आंकड़े एकत्रित किए। पहले उन्होंने यह अध्ययन किया कि इन मेंढकों का भोजन क्या है। इस परीक्षण के लिए मेंढक की स्टामक फ्लशंािग (उल्टी कराने की विधि) की गई। पेट से निकले अवशेषों का प्रयोगशाला में विश्लेषण किया गया। इसमें सबसे अधिक मच्छर और मच्छर के लार्वा मिले। इसके बाद बीटल्स और चीटियों के अवशेष मिले। इससे साबित हुआ कि मच्छरों के प्राकृतिक तरीके से खात्मा करने में यह मेंढक कितना महत्वपूर्ण है।


दो बार मिल चुका है युवा वैज्ञानिक पुरुस्कार
श्रीनगर। स्प्रिरोथिका बेरविसेप्स प्रजाति के मेंढक में आहार, व्यवहार और प्रवास में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए आशीष चौधरी को यूकोस्ट और यूजीसी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में युवा वैज्ञानिक का पुरस्कार मिल चुका है।
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