शैलशिल्पी विकास संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गढ़वाल के प्रथम सांसद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व मंत्री स्व. बलदेव सिंह आर्य की 110वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर उनका भावपूर्ण स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सिमलचौड़ स्थित पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार विनोद शिल्पकार (लखनऊ) ने स्व. आर्य के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने कहा कि स्व. आर्य ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया, लेकिन ऐसे महापुरुष को हमारी सरकारों ने आज भी गुमनाम रखा हुआ है। कहा कि शिल्पकार समाज को उपजातियों में बंटने के बजाय एक सम्मानित शिल्पकार के रूप में संगठित होने की जरूरत है। साथ ही नई पीढ़ी को शिल्पकार समाज के महान विभूतियों के बारे में बताने की जरूरत है। संगठन के संयोजक विकास कुमार आर्य ने कहा कि राज्य गठन के 22 वर्ष बाद भी गढ़वाल की महान विभूतियों में शामिल स्व. बलदेव सिंह आर्य के क्रांतिकारी जीवन का उचित आंकलन नहीं हुआ है। उन्हें गढ़वाल का प्रथम सांसद होने का गौरव प्राप्त है। साथ ही तीन दशकों तक वह यूपी जैसे विशाल राज्य के मंत्री रहे, लेकिन कोटद्वार में उनका कोई स्मारक नहीं है। कहा कि संगठन लगातार सत्तासीन सरकारों से स्मारक बनाने की मांग करता आ रहा है, लेकिन किसी ने भी शिल्पकार समाज की विभूतियों का सम्मान नहीं दिया, जो उन्हें मिलना चाहिए था। इस मौके पर सेवानिवृत्त जिला उद्यान अधिकारी जयदेव सिंह, सेवानिवृत्त डीएफओ धीरजधर बछवाण, डॉ. विनोद सावंत, विनीता भारती, शकुंतला देवी, सतशी प्रकाश, हरीश चंद्र, श्रद्धानंद, संगीता आर्य, हर्षकुमार, सुभाष चंद्र आदि मौजूद रहे।