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दो घंटे ओपीडी में नहीं डाक्टर, भटके मरीज
ब्यूरो/ अमर उजाला कोटद्वार
Updated Tue, 02 Feb 2016 09:58 PM IST
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केंद्र के समान समयबद्ध प्रोन्नत वेतनमान की मांग को लेकर पांचों पर्वतीय जिलों के चिकित्सकों ने दूसरे दिन मंगलवार को भी कार्य बहिष्कार जारी रखा। दो घंटे के कार्य बहिष्कार से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित रही। दूरस्थ इलाकों के मरीजों को दिक्कतों को सामना करना पड़ा। डाक्टरों ने ऐलान किया कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी गई वे आंदोलन पर डटे रहेंगे।
पौड़ी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सुबह नौ से ग्यारह बजे तक कार्य बहिष्कार किया। डॉ. यूएस कंडवाल का कहना था कि डॉक्टरों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर मरीजों पर दिखाई दिया। दर्जनों मरीज जिला अस्पताल में डॉक्टरों का इंतजार करते रहे।
नई टिहरी। जिला अस्पताल बौराड़ी, चंबा, पिलखी, बेलेश्वर, प्रतापनगर, लंबगांव, नरेंद्रनगर, थत्यूड़, नैनबाग, नंदगांव आदि स्थानों पर डाक्टरों ने अपनी एक सूत्रीय मांग के समर्थन में सुबह दो घंटे तक ओपीडी का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते तक दो घंटे के कार्य बहिष्कार के बाद आठ फरवरी से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान सीएमएस डा. वीसी काला, प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के जिलाध्यक्ष डा. अशोक कुमार, सचिव डा. श्याम विजय, डा. अमित राय, डा. महेश खेतान, डा. जगदीश पाठक, डा. सतवंत कौर, डा. रीता काला आदि मौजूद थे।
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रुद्रप्रयाग। यहां जिला अस्पताल में 10 से अधिक सीनियर डाक्टर तैनात हैं। डाक्टरों के कार्य बहिष्कार से ओपीडी सबसे अधिक प्रभावित रही। दूरस्थ क्षेत्रों से अस्पताल में जांच को आए कई मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। दूसरी तरफ भर्ती मरीजों का नियमित चेकअप भी नहीं हो पा रहा है। उधर, अगस्त्युनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ में भी सीनियर डाक्टर दो घंटे कार्य बहिष्कार पर रहे।
फोटो
दो घंटे तक इलाज के लिए तड़पती रही महिला
गोपेश्वर। पेट दर्द से पीड़ित नंदप्रयाग की माहेश्वरी देवी मंगलवार सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंची थी, लेकिन चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के चलते माहेश्वरी 11 बजे तक अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही। कार्य बहिष्कार खत्म होने के बाद ही उसका इलाज किया गया। ऐसे ही प्राथमिक विद्यालय भीमतला के 11 छात्र-छात्राएं खून टेस्ट कराने के लिए शिक्षकों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें भी दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उधर, आंदोलनरत डाक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान डा. वीपी सिंह, डा. टीएस डुंगरियाल, डा. आरकेएस अहलुवालिया, डा. हिमांशु मिश्रा, डा. इंदु पाल, डा. गौतम नैथानी और डा. यशोदा पाल आदि मौजूद थे। सीएमओ डा. विराज शाह का कहना है कि जिला अस्पताल में इमरजेंसी की सेवाओं पर चिकित्सकों की हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ रहा है।
कर्णप्रयाग। सीएचसी कर्णप्रयाग के चिकित्सक छह फरवरी से रोज सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार करेंगे। सीएचसी के अधीक्षक डा. भगवती पुरोहित ने यह जानकारी दी।
कोटद्वार में डाक्टरों ने दोपहर बाद देखे मरीज
कोटद्वार। डॉक्टरों ने डायनेमिक एश्योर्ड कैरियर प्रोगेशन (डीएसीपी) की मांग को लेकर मंगलवार को भी दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। मरीजों को दो घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर 11 बजे ड्यूटी पर लौटे और अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने के लिए राउंड पर चले गए। ओपीडी में मरीजों को देखने का कार्य दोपहर में शुरू हो पाया। ओपीडी में अधिक भीड़ होने के कारण डॉक्टरों ने लोगों की जांच तीन बजे तक जारी रखी। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आईएस सामंत ने बताया कि अपनी एक सूत्री मांग को लेकर डॉक्टरों का दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा है। दो घंटा विलंब से ओपीडी शुुरू जरूर हो रही है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा अतिरिक्त समय लगाकर मरीजों को देखा जा रहा है।
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पौड़ी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सुबह नौ से ग्यारह बजे तक कार्य बहिष्कार किया। डॉ. यूएस कंडवाल का कहना था कि डॉक्टरों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर मरीजों पर दिखाई दिया। दर्जनों मरीज जिला अस्पताल में डॉक्टरों का इंतजार करते रहे।
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नई टिहरी। जिला अस्पताल बौराड़ी, चंबा, पिलखी, बेलेश्वर, प्रतापनगर, लंबगांव, नरेंद्रनगर, थत्यूड़, नैनबाग, नंदगांव आदि स्थानों पर डाक्टरों ने अपनी एक सूत्रीय मांग के समर्थन में सुबह दो घंटे तक ओपीडी का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते तक दो घंटे के कार्य बहिष्कार के बाद आठ फरवरी से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान सीएमएस डा. वीसी काला, प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के जिलाध्यक्ष डा. अशोक कुमार, सचिव डा. श्याम विजय, डा. अमित राय, डा. महेश खेतान, डा. जगदीश पाठक, डा. सतवंत कौर, डा. रीता काला आदि मौजूद थे।
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रुद्रप्रयाग। यहां जिला अस्पताल में 10 से अधिक सीनियर डाक्टर तैनात हैं। डाक्टरों के कार्य बहिष्कार से ओपीडी सबसे अधिक प्रभावित रही। दूरस्थ क्षेत्रों से अस्पताल में जांच को आए कई मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। दूसरी तरफ भर्ती मरीजों का नियमित चेकअप भी नहीं हो पा रहा है। उधर, अगस्त्युनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ में भी सीनियर डाक्टर दो घंटे कार्य बहिष्कार पर रहे।
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दो घंटे तक इलाज के लिए तड़पती रही महिला
गोपेश्वर। पेट दर्द से पीड़ित नंदप्रयाग की माहेश्वरी देवी मंगलवार सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंची थी, लेकिन चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के चलते माहेश्वरी 11 बजे तक अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही। कार्य बहिष्कार खत्म होने के बाद ही उसका इलाज किया गया। ऐसे ही प्राथमिक विद्यालय भीमतला के 11 छात्र-छात्राएं खून टेस्ट कराने के लिए शिक्षकों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें भी दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उधर, आंदोलनरत डाक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान डा. वीपी सिंह, डा. टीएस डुंगरियाल, डा. आरकेएस अहलुवालिया, डा. हिमांशु मिश्रा, डा. इंदु पाल, डा. गौतम नैथानी और डा. यशोदा पाल आदि मौजूद थे। सीएमओ डा. विराज शाह का कहना है कि जिला अस्पताल में इमरजेंसी की सेवाओं पर चिकित्सकों की हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ रहा है।
कर्णप्रयाग। सीएचसी कर्णप्रयाग के चिकित्सक छह फरवरी से रोज सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार करेंगे। सीएचसी के अधीक्षक डा. भगवती पुरोहित ने यह जानकारी दी।
कोटद्वार में डाक्टरों ने दोपहर बाद देखे मरीज
कोटद्वार। डॉक्टरों ने डायनेमिक एश्योर्ड कैरियर प्रोगेशन (डीएसीपी) की मांग को लेकर मंगलवार को भी दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। मरीजों को दो घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर 11 बजे ड्यूटी पर लौटे और अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने के लिए राउंड पर चले गए। ओपीडी में मरीजों को देखने का कार्य दोपहर में शुरू हो पाया। ओपीडी में अधिक भीड़ होने के कारण डॉक्टरों ने लोगों की जांच तीन बजे तक जारी रखी। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आईएस सामंत ने बताया कि अपनी एक सूत्री मांग को लेकर डॉक्टरों का दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा है। दो घंटा विलंब से ओपीडी शुुरू जरूर हो रही है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा अतिरिक्त समय लगाकर मरीजों को देखा जा रहा है।