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Kotdwar News: कण्वाश्रम, कोठला, नंदपुर समेत पांच गांवों की कई हेक्टेयर जमीन लील गई मालन नदी
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कोटद्वार। वर्ष 2017 से लगातार आपदा की चपेट में चल रहे कोटद्वार भाबर में लोगों की परेशानी 2024 में भी कम होने का नाम नहीं ले रही है। आपदा प्रभावित राजस्व क्षेत्रों में तो शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि बाढ़ सुरक्षा के काम करवा रहे हैं, लेकिन लैंसडौन वन प्रभाग के वन क्षेत्र में बहने वाली मालन नदी के कटाव की ओर आंखें मूंद ली गई हैं। इसका खामियाजा मालन नदी के बाएं तट पर स्थित कण्वाश्रम से लेकर कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढाक और शिवराजपुर तक की आबादी और काश्तकार झेल रहे हैं। इस इलाके में मालन नदी हर साल कई बीघा जमीन को लील रही है।
मालन नदी के तट पर बसी आबादी नदी के प्रकोप को 2017 की बरसात से झेलने के लिए मजबूर हैं। इसके बाद हर साल बरसात में नदी बाएं तट पर स्थित कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढाक और शिवराजपुर की जमीन काट रही है। बीते 7 साल में इन गांवों में करीब पांच हेक्टेयर से अधिक जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। नंदपुर के काश्तकार मदन मोहन जोशी, रामेश्वर प्रसाद, विजय जोशी, सुरेंद्र प्रसाद, आरएल कुकरेती, चंद्रमोहन कुकरेती, मदन मोहन कुकरेती व आशुतोष बलूनी का कहना है कि वर्ष 2023 में मालन नदी का उफान खतरनाक रहा। जहां एक ओर मालन नदी का पुल धराशायी हो गया, वहीं कण्वाश्रम से लेकर शिवराजपुर तक के पांच गांवों की कई बीघा जमीन, बगीचे, खेत खलिहान व सिंचाई गूलें तक नदी में समा गई। हाल यह है कि सिंचाई गूलेंं बहने से बाकी बची खेती भी सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही है। लोग सिंचाई विभाग से सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग नदी क्षेत्र को अपना बताते हुए एनओसी नहीं दे रहा है। जल्द ही सुरक्षा दीवार नहीं बनी तो भूमि कटाव यहां घराें को भी नुकसान पहुंचा सकता है। पदमपुर मोटाढाक के निवर्तमान पार्षद सौरभ नौडियाल, नंदपुर के निवर्तमान पार्षद दीपक लखेड़ा का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से एक बार फिर से आपदा मद में सुरक्षा दीवार का आगणन बनाकर भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति और योजना के धरातल पर उतरने का प्रभावित परिवार इंतजार कर रहे हैं।
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मालन नदी के बाएं तट पर सुरक्षा के लिए वायरक्रेट लगाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालीन बचाव योजना के लिए करीब 13 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा योजना का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजा गया है। बजट मिलने के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा। पूर्व में इस क्षेत्र में वन विभाग की ओर से सुरक्षा दीवार बनाने में दिक्कत पैदा करता रहा है।
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-विनोद कुमार, एसडीओ सिंचाई उपखंड कोटद्वार
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मालन नदी के तट पर बसी आबादी नदी के प्रकोप को 2017 की बरसात से झेलने के लिए मजबूर हैं। इसके बाद हर साल बरसात में नदी बाएं तट पर स्थित कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढाक और शिवराजपुर की जमीन काट रही है। बीते 7 साल में इन गांवों में करीब पांच हेक्टेयर से अधिक जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। नंदपुर के काश्तकार मदन मोहन जोशी, रामेश्वर प्रसाद, विजय जोशी, सुरेंद्र प्रसाद, आरएल कुकरेती, चंद्रमोहन कुकरेती, मदन मोहन कुकरेती व आशुतोष बलूनी का कहना है कि वर्ष 2023 में मालन नदी का उफान खतरनाक रहा। जहां एक ओर मालन नदी का पुल धराशायी हो गया, वहीं कण्वाश्रम से लेकर शिवराजपुर तक के पांच गांवों की कई बीघा जमीन, बगीचे, खेत खलिहान व सिंचाई गूलें तक नदी में समा गई। हाल यह है कि सिंचाई गूलेंं बहने से बाकी बची खेती भी सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही है। लोग सिंचाई विभाग से सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग नदी क्षेत्र को अपना बताते हुए एनओसी नहीं दे रहा है। जल्द ही सुरक्षा दीवार नहीं बनी तो भूमि कटाव यहां घराें को भी नुकसान पहुंचा सकता है। पदमपुर मोटाढाक के निवर्तमान पार्षद सौरभ नौडियाल, नंदपुर के निवर्तमान पार्षद दीपक लखेड़ा का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से एक बार फिर से आपदा मद में सुरक्षा दीवार का आगणन बनाकर भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति और योजना के धरातल पर उतरने का प्रभावित परिवार इंतजार कर रहे हैं।
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मालन नदी के बाएं तट पर सुरक्षा के लिए वायरक्रेट लगाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालीन बचाव योजना के लिए करीब 13 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा योजना का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजा गया है। बजट मिलने के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा। पूर्व में इस क्षेत्र में वन विभाग की ओर से सुरक्षा दीवार बनाने में दिक्कत पैदा करता रहा है।
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-विनोद कुमार, एसडीओ सिंचाई उपखंड कोटद्वार