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मालन नदी का नए सिरे से सीमांकन करने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
Updated Mon, 26 Dec 2016 10:22 PM IST
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भाबर की मालन नदी में खनन, चुगान के लिए वन विकास निगम की ओर से की गई तैयारियां।
- फोटो : अमर उजाला
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कोटद्वार की नदियों में सालों से बंद खनन के खुलने में अभी कुछ और समय लगेगा। नदी तल पर स्थित पुलों के दोनों ओर एक किलोमीटर के दायरे में खनन, चुगान पर नैनीताल हाईकोर्ट के प्रतिबंध लगाने से हरकत में आए जिला प्रशासन ने वन विभाग, वन निगम और खनन विभाग को मालन नदी का नए सिरे से सीमांकन करने के आदेश दिए हैं।
संबंधित विभाग जल्द ही मालन नदी में सीमांकन कार्य प्रारंभ करेंगे। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद राज्य सरकार ने गत छह अक्तूबर को शासनादेश जारी कर मालन नदी में खनन और चुगान की अनुमति प्रदान की थी। इसी बीच जिला प्रशासन, वन विभाग और कार्यदायी संस्था वन विकास निगम मालन नदी में खनन चुगान शुरू करने की औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गये।
अधिकारियों की मानें तो मालन नदी में धर्मकांटा स्थापना, दफ्तर और बिजली कनेक्शन लगवा दिए गए। खनन कार्य शुरू होने में कुछ दिन ही बचे थे कि नैनीताल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका के फैसले में उत्तराखंड में नदी तल पर बने पुलों के एक किमी दोनों ओर नदियों में खनन, चुगान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिया।
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हाईकोर्ट के आदेशों के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को फिर से मालन नदी का सीमांकन कार्य करने के आदेश दिए हैं।
वन विकास निगम के विभागीय विक्रय प्रबंधक राजेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि छह अक्टूबर 2016 को जारी शासनादेश के क्रम में शासन की ओर से वन विकास निगम को लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत मालन नदी में 35.356 हेक्टेयर वन भूमि पर पांच वर्ष की अवधि के लिए खनन पट्टा स्वीकृत हुआ था।
9 अक्टूबर 2016 को उक्त खनन पट्टे का सीमांकन कार्य भी पूरा कर दिया गया। खनन की तैयारियां पूरी करने के लिए वन विकास निगम ने लाखों रुपये खर्च करके मालन नदी के पास गेट, धर्मकांटा आदि की व्यवस्था कर दी। हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद अब मालन नदी में खनन के लिए नए सिरे से सीमांकन कार्य किया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नदी तल पर स्थित पुल के एक किलोमीटर के दायरे में नदियों में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसके तहत मालन नदी में खनन के लिए स्वीकृत 35.356 हेक्टेयर खनन पट्टे का फिर से सीमांकन कार्य किया जाएगा।
-राकेश तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।
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संबंधित विभाग जल्द ही मालन नदी में सीमांकन कार्य प्रारंभ करेंगे। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद राज्य सरकार ने गत छह अक्तूबर को शासनादेश जारी कर मालन नदी में खनन और चुगान की अनुमति प्रदान की थी। इसी बीच जिला प्रशासन, वन विभाग और कार्यदायी संस्था वन विकास निगम मालन नदी में खनन चुगान शुरू करने की औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गये।
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अधिकारियों की मानें तो मालन नदी में धर्मकांटा स्थापना, दफ्तर और बिजली कनेक्शन लगवा दिए गए। खनन कार्य शुरू होने में कुछ दिन ही बचे थे कि नैनीताल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका के फैसले में उत्तराखंड में नदी तल पर बने पुलों के एक किमी दोनों ओर नदियों में खनन, चुगान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिया।
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हाईकोर्ट के आदेशों के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को फिर से मालन नदी का सीमांकन कार्य करने के आदेश दिए हैं।
वन विकास निगम के विभागीय विक्रय प्रबंधक राजेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि छह अक्टूबर 2016 को जारी शासनादेश के क्रम में शासन की ओर से वन विकास निगम को लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत मालन नदी में 35.356 हेक्टेयर वन भूमि पर पांच वर्ष की अवधि के लिए खनन पट्टा स्वीकृत हुआ था।
9 अक्टूबर 2016 को उक्त खनन पट्टे का सीमांकन कार्य भी पूरा कर दिया गया। खनन की तैयारियां पूरी करने के लिए वन विकास निगम ने लाखों रुपये खर्च करके मालन नदी के पास गेट, धर्मकांटा आदि की व्यवस्था कर दी। हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद अब मालन नदी में खनन के लिए नए सिरे से सीमांकन कार्य किया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नदी तल पर स्थित पुल के एक किलोमीटर के दायरे में नदियों में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसके तहत मालन नदी में खनन के लिए स्वीकृत 35.356 हेक्टेयर खनन पट्टे का फिर से सीमांकन कार्य किया जाएगा।
-राकेश तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।