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पुरानी जेल की जमीन संस्कृति विभाग को हस्तांतरित
पौड़ी
Updated Thu, 25 Feb 2016 09:43 PM IST
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राज्य स्तरीय संग्रहालय के लिए पुरानी जेल की जमीन संस्कृति विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। इससे अब जल्दी ही संग्रहालय बनने की उम्मीदें हिलोरें मारने लगी हैं।
वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने पुरानी जेल के स्थान पर राज्य स्तरीय संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी। तब संग्रहालय की डीपीआर बनाने समेत अन्या कार्यों के लिए साढ़े नौ लाख संस्कृति विभाग को रिलीज किए गए। इसके निर्माण की जिम्मेदारी उत्तराखंड पेयजल निगम की अस्थायी निर्माण इकाई पौड़ी को दी गई थी।
उत्तराखंड पेयजल निगम ने वर्ष 2012 में संग्रहालय के निर्माण के लिए 4.02 करोड़ का आगणन बनाकर संस्कृति विभाग को भेजा, लेकिन जमीन हस्तातंरण नहीं होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। संस्कृति निदेशालय के निदेशक डा. बीना भट्ट ने कहा कि अब शासन ने पुरानी जेल की .094 हेक्टेयर भूमि संस्कृति विभाग को हस्तांतरित कर दी है। इसका शासनादेश भी जारी हो चुका है।
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कई चीजें बननी हैं संग्रहालय में
प्रस्तावित संग्रहालय में कई चीजें बननी है। पेयजल निगम की ओर से तैयार आगणन के अनुसार इसमें संपदा कक्ष, लोक साहित्य कक्ष, लोकजीवन कक्ष, लोकसंगीत, लोकवाद्य यंत्र कक्ष, जनजाति सांस्कृतिक कक्ष, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कक्ष, धार्मिक पर्यटन कक्ष, रिकार्ड रूम, मिनी आडिटोरियम, प्रशासनिक ब्लाक आदि का निर्माण होना है।
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वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने पुरानी जेल के स्थान पर राज्य स्तरीय संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी। तब संग्रहालय की डीपीआर बनाने समेत अन्या कार्यों के लिए साढ़े नौ लाख संस्कृति विभाग को रिलीज किए गए। इसके निर्माण की जिम्मेदारी उत्तराखंड पेयजल निगम की अस्थायी निर्माण इकाई पौड़ी को दी गई थी।
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उत्तराखंड पेयजल निगम ने वर्ष 2012 में संग्रहालय के निर्माण के लिए 4.02 करोड़ का आगणन बनाकर संस्कृति विभाग को भेजा, लेकिन जमीन हस्तातंरण नहीं होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। संस्कृति निदेशालय के निदेशक डा. बीना भट्ट ने कहा कि अब शासन ने पुरानी जेल की .094 हेक्टेयर भूमि संस्कृति विभाग को हस्तांतरित कर दी है। इसका शासनादेश भी जारी हो चुका है।
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कई चीजें बननी हैं संग्रहालय में
प्रस्तावित संग्रहालय में कई चीजें बननी है। पेयजल निगम की ओर से तैयार आगणन के अनुसार इसमें संपदा कक्ष, लोक साहित्य कक्ष, लोकजीवन कक्ष, लोकसंगीत, लोकवाद्य यंत्र कक्ष, जनजाति सांस्कृतिक कक्ष, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कक्ष, धार्मिक पर्यटन कक्ष, रिकार्ड रूम, मिनी आडिटोरियम, प्रशासनिक ब्लाक आदि का निर्माण होना है।