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मोटर नगर को लेकर आर्बिट्रेशन में दमदार ढंग से पैरवी करने के दिए निर्देश
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मोटर नगर बस अड्डे को लेकर आगामी 10 मई को हाईकोर्ट के निर्देश पर आर्बिट्रेशन (माध्यस्थम) कोर्ट में दोनों पक्षों की गवाही होगी। बुधवार को मेयर हेमलता नेगी ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिवक्ता और अधिकारियों को दमदार ढंग से अपनी बात रखने के निर्देश दिए, ताकि मामले का जल्द से जल्द निस्तारण हो सके।
मेयर हेमलता नेगी ने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की संस्तुति पर नगर पालिका की ओर से बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर रामेष्ठ कंसट्रक्शन कंपनी को मोटर नगर की भूमि को 25 वर्षों के लिए अनुबंध पर दिया गया था, लेकिन तत्कालीन नगर पालिका की ओर से अनुबंध के अनुसार पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई। साथ ही उक्त परिसर में स्थित दुकानों को भी नहीं हटवाया गया, जिससे उक्त कंपनी को निर्माण कार्य करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। वर्ष 2017 में यह मामला आर्बिट्रेशन कोर्ट में चला गया। नगर निगम बन जाने के बाद विगत तीन वर्षों से उक्त विवाद का हल निकालने के लिए नगर आयुक्तों से पैरवी कराने के साथ ही शासन से पत्राचार के बाद भी उक्त विवाद का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अब उच्च न्यायालय के निर्देश पर आर्बिट्रेशन कोर्ट में सुनवाई चल रही है। उन्होंने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मोटर नगर निर्माण में आ रही दिक्कतों को शीघ्र दूर करने के लिए सार्थक पहल करने के निर्देश दिए।
क्या है आर्बिट्रेशन
आर्बिट्रेशन (माध्यस्थम) एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है, जिसमें पक्षकर किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से न्यायालय का सहारा लिए बिना अपने विवादों का निपटारा करवाते हैं।
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मेयर हेमलता नेगी ने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की संस्तुति पर नगर पालिका की ओर से बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर रामेष्ठ कंसट्रक्शन कंपनी को मोटर नगर की भूमि को 25 वर्षों के लिए अनुबंध पर दिया गया था, लेकिन तत्कालीन नगर पालिका की ओर से अनुबंध के अनुसार पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई। साथ ही उक्त परिसर में स्थित दुकानों को भी नहीं हटवाया गया, जिससे उक्त कंपनी को निर्माण कार्य करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। वर्ष 2017 में यह मामला आर्बिट्रेशन कोर्ट में चला गया। नगर निगम बन जाने के बाद विगत तीन वर्षों से उक्त विवाद का हल निकालने के लिए नगर आयुक्तों से पैरवी कराने के साथ ही शासन से पत्राचार के बाद भी उक्त विवाद का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अब उच्च न्यायालय के निर्देश पर आर्बिट्रेशन कोर्ट में सुनवाई चल रही है। उन्होंने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मोटर नगर निर्माण में आ रही दिक्कतों को शीघ्र दूर करने के लिए सार्थक पहल करने के निर्देश दिए।
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क्या है आर्बिट्रेशन
आर्बिट्रेशन (माध्यस्थम) एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है, जिसमें पक्षकर किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से न्यायालय का सहारा लिए बिना अपने विवादों का निपटारा करवाते हैं।
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