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दहेज हत्या में पति और सास को सात साल का सश्रम कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
Updated Fri, 10 Mar 2017 09:53 PM IST
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कोटद्वार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने मीना देवी दहेज हत्याकांड में अभियुक्त पति और सास को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्तों को एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर उन्हें पंद्रह-पंद्रह दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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जिला शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि धुमाकोट थाने के गोलीखाल क्षेत्र के भरतपुर गांव में मीना देवी पत्नी जगमोहन सिंह (24) ने आठ जुलाई 2015 की रात को जहर खा लिया था। इससे महिला की घर पर ही मौत हो गई थी। पुलिस की सूचना पर मीना देवी के मायके वाले घटनास्थल पर पहुंच गए थे। घटना के बाद मृतका के भाई कोटा पिंजोली निवासी प्रेम सिंह पुत्र भोपाल सिंह ने उसकी बहन की दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी थी। धुमाकोट पुलिस ने मामले में आईपीसी की धारा 498-ए, 34 और 304-बी में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। अभियोजन पक्ष के अनुसार मीना देवी का पति जगमोहन दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। घटना के कुछ दिन पहले से वह घर पर ही था। मीना देवी के पोस्टमार्टम में बिसरा सुरक्षित रखवा लिया गया था। बिसरे की जांच हुई तो उसमें जहर पाया गया था। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मृतका के पति जगमोहन सिंह और सास गुड्डी देवी को दहेज उत्पीड़न और हत्या का दोषी करार दिया। शुक्रवार को अदालत ने दोनों को सात-सात साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई।
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