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Kotdwar News: ओपीडी बंद हुई तो जिम्मेदार होगा अस्पताल प्रशासन
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कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल के अस्थि विभाग में तैनात दोनों चिकित्सकों की संविदा समाप्त होने से अस्पताल प्रशासन पहले ही चिंतित था, अब निदेशालय के एक पत्र ने उसकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। दरअसल निदेशालय ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर 28 फरवरी के बाद अस्थि विभाग की ओपीडी बंद हुई, तो इसके लिए सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार होगा। संविदा समाप्ति के महज चार दिन पहले पत्र में एक माह पहले नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कहना चर्चा का विषय बना है।चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड की प्रभारी महानिदेशक सुनीता टम्टा ने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को पत्र जारी कर बताया है कि जिन अस्पतालों में संविदा पर चिकित्सक तैनात हैं, वहां से काफी विलंब से या फिर संविदा अवधि समाप्त होने के बाद नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव भेजना गलत है। नवीनीकरण में विलंब होने पर चिकित्सालय का कार्य प्रभावित होता है। 24 फरवरी को जारी किए गए पत्र में संविदा अवधि समाप्त होने से एक माह पहले नवीनीकरण का प्रस्ताव महानिदेशालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि लेटलतीफी के कारण अगर संविदा का नवीनीकरण नहीं होता है और अस्पताल में ओपीडी प्रभावित होती है, तो इसके लिए प्रमुख अधीक्षक जिम्मेदार होंगे।
फिलहाल इन विभागीय औपचारिकताओं से अलग नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में एक मार्च को अस्थि विभाग पर ताले लटकने की आशंका बढ़ गई है। रोजाना 200 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी और प्रत्येक सप्ताह 10 से 15 ऑपरेशन प्रभावित होने से मरीजों को भटकना पड़ेगा।
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10 फरवरी जारी पत्र में नहीं किया था उल्लेख
प्रभारी महानिदेशक की ओर से संविदा मामले में 10 फरवरी को भी एक पत्र स्वास्थ्य अधिकारियों को जारी किया गया था। जिसमें 28 फरवरी को संविदा समाप्ति की स्थिति में चिकित्सकों से काम नहीं लेने के निर्देश तो दिए गए थे, लेकिन नवीनीकरण के प्रस्तावों को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया था।
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विगत सप्ताह संविदा नवीनीकरण का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जा चुका है, अभी तक नवीनीकरण के संबंध में कोई मैसेज नहीं मिला है।
-डॉ. डीके सिंह, प्रभारी पीएमएस, बेस अस्पताल कोटद्वार
फिलहाल इन विभागीय औपचारिकताओं से अलग नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में एक मार्च को अस्थि विभाग पर ताले लटकने की आशंका बढ़ गई है। रोजाना 200 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी और प्रत्येक सप्ताह 10 से 15 ऑपरेशन प्रभावित होने से मरीजों को भटकना पड़ेगा।
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10 फरवरी जारी पत्र में नहीं किया था उल्लेख
प्रभारी महानिदेशक की ओर से संविदा मामले में 10 फरवरी को भी एक पत्र स्वास्थ्य अधिकारियों को जारी किया गया था। जिसमें 28 फरवरी को संविदा समाप्ति की स्थिति में चिकित्सकों से काम नहीं लेने के निर्देश तो दिए गए थे, लेकिन नवीनीकरण के प्रस्तावों को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया था।
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विगत सप्ताह संविदा नवीनीकरण का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जा चुका है, अभी तक नवीनीकरण के संबंध में कोई मैसेज नहीं मिला है।
-डॉ. डीके सिंह, प्रभारी पीएमएस, बेस अस्पताल कोटद्वार