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पूर्व सहायक प्रोफेसर ने एनआईटी प्रबंधन पर लगाए आरोप
अमर उजाला/श्रीनगर।
Updated Tue, 17 May 2016 11:09 PM IST
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एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के पूर्व सहायक प्रोफेसर (संविदा) सुवदीप भटाब्याल ने एनआईटी प्रशासन पर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मसले पर हाईकोर्ट की शरण लेने की बात कही है। इधर, एनआईटी प्रशासन ने सारे आरोपों को खारिज किया है।
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फरवरी माह में एनआईटी ने पूर्व से संविदा में कार्यरत शिक्षकों के ग्रेड पे बढ़ाने के लिए साक्षात्कार लिए थे। हाल में इनका परिणाम घोषित हुआ है। इस प्रक्रिया में कंप्यूटर साइंस के सहायक प्रोफेसर भटाब्याल और कैमिकल इंजीनियरिंग के एपी डा. अपूर्व मंडल सफल नहीं हुए। इस पर एनआईटी ने उनका कांट्रेक्ट समाप्त करते हुए कार्यमुक्त कर दिया।
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एनआईटी की कार्रवाई से नाराज भटाब्याल ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए संस्थान के निदेशक और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसे काम के लिए स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए, जिसकी वह अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे थे। संस्थान शिक्षक/कर्मचारियों को परेशान करने के लिए अपनी ओर से नए नियम निकालता रहता है।
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उन्होंने कहा कि साल 2013 में एनआईटी बीओजी (शासकीय मंडल) ने प्रत्येक शिक्षक को शोध कार्य के लिए 10 लाख रुपये देने के आदेश दिए थे। जिसको दिया नहीं गया। एनआईटी उत्तराखंड टॉप 100 संस्थान में जगह नहीं बना पाया है। जबकि इसके साथ खुले एनआईटी इस सूची में हैं।
इधर, एनआईटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह ने बताया कि भटाब्याल को प्रक्रिया अनुसार कार्यमुक्त किया गया है। जो अभ्यर्थी साक्षात्कार में सफल नहीं रहता है, वह संविदा की शर्त के अनुसार स्वत: बाहर हो जाता है। जिम्मेदारी पूरी नहीं करने पर ही स्पष्टीकरण मांगा जाता है।
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