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खुद हवा बनाकर दौड़ेगी साइकिल
अमर उजाला/श्रीनगर।
Updated Tue, 07 Jun 2016 09:22 PM IST
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हवा से चलने वाली अपनी साइकिल के साथ प्रहलाद नेगी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हालांकि हर साइकिल हवा के दबाव से ही चलती है। बावजूद इसके देलचौरी (सेमू) गांव के 26 वर्षीय युवक जिस साइकिल को विकसित कर रहा है, वह कुछ हटकर है।
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इस साइकिल को उसने एअर प्रेशर रनिंग साइकिल (हवा के दबाव से चलने वाली साइकिल) का नाम दिया है। यह साइकिल चलने के दौरान स्वत: हवा बनाती है। फिलहाल यह साइकिल प्रोटोटाइप (प्रारंभिक अवस्था) मॉडल है। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए इसमें विशेषज्ञों की सलाह पर कुछ जरूरी सुधार की जरूरत है। इस प्रयोग के सफल रहने पर भविष्य में वाहन चलाने के लिए ईंधन पर निर्भरता खत्म होने के साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
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देलचौरी के प्रह्लाद नेगी ने पांच साल की मेहनत के बाद इको फ्रेंडली साइकिल तैयार की है। 12 वीं तक पढ़े प्रह्लाद पेशे से मोटर मैकेनिक हैं। वर्तमान में वह पौड़ी में अपने मामा रविंद्र रावत की गैराज में काम कर रहे हैं। वह इससे पहले चार साल तक हरिद्वार में मोटर साइकिल बनाने वाली एक कंपनी में काम कर चुके हैं। यहां इंजन बनाते वक्त उन्हें ख्याल आया कि पिस्टन चलाने के लिए पैट्रोल के बजाय हवा का इस्तेमाल किया जाए, तो पर्यावरण प्रदूषित होने से बच सकता है।
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फैक्टरी में ड्यूटी करने के बाद वह रोजाना हवा के प्रेशर से चलने वाले ईंजन बनाने में जुट जाते। चार साल की मेहनत के बाद ईंजन तैयार हुआ, लेकिन वह स्टार्ट ही नहीं हुआ। बावजूद इसके उसने हिम्मत नहीं हारी। कंपनी में समय की दिक्कत को देखते हुए अपने मामा की दुकान में काम करने का निर्णय लिया। इस बार उन्होंने मोटर साइकिल के बजाय साइकिल के लिए ईंजन बनाने की सोची। मामा के सहयोग से चार माह की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार प्रह्लाद ने हवा के प्रेशर से चलने वाली साइकिल चलाकर दिखा दी।
ऐसे काम करती है साइकिल
इस साइकिल में एअर कंप्रेशर, एअर टैंक, एअर मोडिफाई सिस्टम (पिस्टन) लगे हैं। शुरू में टैंक में हवा भरनी पड़ती है। जैसे-जैसे साइकिल चलती है, वह स्वत: कंप्रेशर से हवा भरनी शुरू कर देती है। कंप्रेशर और पिस्टन टायरों से जुड़े हुए हैं। कंप्रेशर टायरों की गति से हवा को एअर टैंक में भेजता है। इस दवाब से पिस्टन दौड़ता है, जो टायरों को आगे की ओर धकेलता है।
बैटरी चालित दोपहिया को दे सकते मात
श्रीनगर। अभी प्रह्लाद की इको फ्रेंडली साइकिल सामान्य साइकिल की तरह चलती है। प्रह्लाद बताते हैं कि उन्हें किसी संस्थान से तकनीकी सहयोग और उपकरणों को हल्का बनाने वाली सामग्री मिले, तो वह बैटरी चलित दोपहिया को भी मात दे सकते हैं। अभी साइकिल के एअर एक्सीलेटर पर भी काम किया जाना बाकी है। इसके लगने से स्पीड पर नियंत्रण हो जाएगा। साइकिल के डंडों का स्थान एअर टैंक और कंप्रेशर ले सकते हैं।
साइकिल को लोगों की जरूरत के मुताबिक बनाना जरूरी है। इस खोज में मेरे छह लाख रुपये से ऊपर खर्च हो चुके हैं। पैसों और संसाधनों के अभाव में प्रोजक्ट रोकना पड़ रहा है। - प्रह्लाद नेगी
प्रह्लाद का प्रयोग निस्संदेह सराहनीय है। हालांकि यह देखना पड़ेगा कि यह व्यवसायिक दृष्टि से कितना उपयोगी हो सकता है। प्रह्लाद को एनआईटी और आईआईटी जैसे शोध संस्थानों की मदद लेनी चाहिए। - राम इकबाल यादव, विभागाध्यक्ष मैकेनिकल इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक श्रीनगर