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तबादलों की उम्मीद टूटी
अमर उजाला/पौड़ी।
Updated Tue, 24 May 2016 09:53 PM IST
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शिक्षा विभाग में नियम अजब-गजब हैं। शिक्षकों और परिजनों के गंभीर बीमार होने पर उपचार और विकलांग परिजनों की देखभाल के लिए अनुरोध तबादलों के लिए विभाग में बेतुके नियम बनाए हुए हैं। प्राइमरी स्कूलों के हेड और जूनियर हाईस्कूलों के सहायकों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अंतरजनपदीय तबादले नहीं किए जा रहे हैं। चाहे कोई शिक्षक कैंसर, एड्स, बाईपास सर्जरी से क्यों न पीड़ित हो। सौ फीसदी विकलांग परिजनों की देखभाल के लिए भी इनके अंतरजनपदीय तबादले नहीं किए जा रहे हैं। राज्यपाल से आदेश मिलने के बाद मंगलवार को अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा गढ़वाल मंडल के कार्यालय में अंतरजनपदीय काउंसिलिंग के लिए पहुंची शिक्षिकाओं को विभाग के नियमों के चलते रोते हुए लौटने पर मजबूर कर दिया।
केस - एक
कैंसर से पीड़ित प्राथमिक विद्यालय डांग भटवाड़ी, उत्तरकाशी की प्रधानाध्यापिका पुष्पा भट्ट वर्ष 2013 से देहरादून जनपद में स्थानांतरण के लिए विभागीय अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुकी हैं। बकौल भट्ट इस बार राज्यपाल से मिलीं तो उन्होंने अंतरजनपदीय तबादले के लिए संस्तुति कर दी। काउंसिलिंग में पहुंची लेकिन यहां पर वर्तमान जनपद में ही किसी सुगम स्कूल में तैनाती की बात कही गई तो उनके आंसू निकल आए। भट्ट ने कहा कि उसे इलाज के लिए दून जाना पड़ता है। इससे अध्यापन कार्य भी प्रभावित होता है। दून में ट्रांसफर हो जाता तो उनका बेहतर इलाज हो सकता।
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केस - दो
हरिद्वार निवासी प्राथमिक विद्यालय पीपली, रुद्रप्रयाग में प्रधानाध्यापिका संगीता गुप्ता की बेटी सौ फीसदी विकलांग है। गंभीर बीमारी के बाद पति की मौत हो गई। मंगलवार को पति की तेरहवीं थी। संगीता गुप्ता बीमार पति के इलाज और बेटी की देखरेख के लिए अंतरजनपदीय स्थानांतरण के तहत हरिद्वार जनपद में तबादला मांग रही थीं। पति की तो मौत हो गई लेकिन बेटी की ठीक से देखभाल हो सकेगी इस कारण काउंसिलिंग में पहुंची। राज्यपाल के आदेश के बावजूद उनको अंतरजनपदीय तबादले का लाभ नहीं मिला।
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केस - तीन
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सुनील जोशीमठ में विज्ञान अध्यापिका साधना नेगी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। इलाज में सहूलित के लिए देहरादून स्थानांतरण के लिए विभाग से लेकर सब जगह गुहार लगाई। राज्यपाल की ओर से अंतरजनपदीय स्थानांतरण का आदेश मिला था, लेकिन यहां उनकी भी उम्मीद टूट गई।
केस - चार
राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल नैलकुड़ाव दशोली, चमोली में तैनात चंद्रकला डिमरी के पति की हार्ट सर्जरी हुई है। इलाज के लिए 15-15 दिन में देहरादून जाना पड़ता है। उन्हें अंतरजनपदीय तबादले के लिए मना कर दिया गया।
केस - पांच
प्राथमिक विद्यालय वस्टी, रुद्रप्रयाग में प्रधानाध्यापिका शशिकला बिष्ट की दोनों किडनियां फेल हो गई हैं। डायलिसिस के लिए 15 दिन में दून जाना पड़ता है। उपचार की दून और दिल्ली में सुविधा है। बेहतर इलाज और समय बचाने के लिए देहरादून तबादला मांगा था लेकिन राज्यपाल के आदेश के बावजूद उनका अंतरजनदीय स्थानांतरण नहीं हुआ।
केस - छह
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुमराड़ा चिन्यालीसौंड, उत्तरकाशी में सहायक अध्यापिका गंगा नौटियाल की बेटी सौ प्रतिशत मूक बधिर है। कक्षा एक से आठ तक उनकी बेटी की शिक्षा दून में नन्हीं दुनिया में हुई। बेटी की आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने देहरादून तबादला मांगा था, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। बोलीं 18 साल से दुर्गम में अध्यापन कर रही हैं, आज उन्हें बेटी की पढ़ाई के लिए दून मांगा तो सुनवाई नहीं हो रही है।
केस - सात
जूनियर हाईस्कूल छिनका, रुद्रप्रयाग में तैनात जगदेश्वरी बहुगुणा अटैचमेंट में देहरादून में हैं। बीमारी के चलते पति की दो माह पहले मृत्यु हो गई। परिवार और अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए जगदेश्वरी ने दून में की तैनाती देने की गुजारिश की थी। राज्यपाल से आदेेश मिलने के बावजूद उन्हें निराश होना पड़ा।
कोट
विभाग की नियमावली के अनुसार प्राइमरी विद्यालय के हेड और जूनियर हाईस्कूल के सहायकों को अंतरजनपदीय तबादले का लाभ नहीं मिल सकता है। ये लोग चाहें तो जिस जनपद में तैनात हैं वहां पर किसी भी विद्यालय में तैनाती मांग सकते हैं।
- रविशंकर आर्य, अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा गढ़वाल मंडल