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Kotdwar News: एक दशक पहले बना पुल, एप्रोच निर्माण में फंसा वन भूमि हस्तांतरण का पेच

Tue, 05 May 2026 06:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Tue, 05 May 2026 06:52 PM IST
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Bridge Built a Decade Ago: Approach Construction Stalled Over Forest Land Transfer Tangle
सीरूबाड़ी-अमलेसा-धौलखेतखाल मोटर मार्ग का है मामला
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पैदल आवाजाही के लिए मजबूर क्षेत्रवासी
दुगड्डा (कोटद्वार)। जयहरीखाल के सीरूबाड़ी-अमलेसा-लांगबाड़ी-धौलखेतखाल मोटर मार्ग का निर्माण कार्य दो दशक से अधूरा है। 700 मीटर वन भूमि हस्तांतरण नहीं होने से प्लेन नदी में बने पुल की एप्रोच भी पिछले डेढ़ दशक से अधर में लटकी है जिससे ग्रामीणों को बरसात में गंतव्य तक पहुंचने के लिए पैदल आवाजाही करना मजबूरी बन गई है।
ढौंटियाल, रथुवाढाब के लोगों की लैंसडौन, जयहरीखाल समेत जनपद मुख्यालय पौड़ी आदि क्षेत्रों में आवाजाही के लिए शासन ने वर्ष 2005-06 में 10 किमी. सीरूबाड़ी, अमलेसा, लांगबाड़ी, धौलखेतखाल मोटर मार्ग निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी। 134.15 लाख रुपये की लागत से मार्ग का निर्माण कार्य शुरू किया गया।
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वर्ष 2010 में सड़क बनकर तैयार हुई। इसके बाद सीरूबाड़ी के निकट प्लेन नदी में पुल का निर्माण भी किया गया। सीरूबाड़ी से लांगबाड़ी के बीच करीब सात सौ मीटर वन भूमि का हस्तांतरण अभी तक नहीं हो पाया है जिससे पुल निर्माण के बाद एप्रोच का निर्माण नहीं होने से मार्ग स्टेट हाईवे-9 से लिंक नहीं हो पाया है।
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कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग लैंसडौन की प्लेन रेंज की वन भूमि के हस्तांतरण के लिए जुलाई 2015 में वन विभाग की ओर से निरीक्षण किया गया था। वन भूमि हस्तांतरण प्रकरण वर्तमान में भी अधर में लटका है। स्टेट हाईवे से लिंक नहीं होने से ग्रामीणों को बरसात में सिर पर बोझ लेकर गंतव्य तक पैदल ही आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पुल की एप्रोच बनाकर उन्हें सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

सीरूबाड़ी-अमलेसा-धौलखेतखाल मोटर मार्ग में कुछ हिस्सा वन भूमि है। लोनिवि ने बिना अनुमति उस पर सड़क निर्माण कार्य कर दिया था। मामले में संबंधित विभाग की ओर से उचित माध्यम से प्रस्ताव मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


- तरुण एस, डीएफओ केटीआर वन प्रभाग लैंसडौन।

सीरूबाड़ी-अमलेसा-धौलखेतखाल मोटर मार्ग का कुछ भू-भाग आरक्षित वन क्षेत्र में है। बिना अनुमति आरक्षित वन भूमि पर पूर्व में सड़क निर्माण कार्य कराया गया था। इस संबंध में केटीआर को भूमि हस्तांतरण के संबंध में दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- दिलीप रावत, विधायक लैंसडौन विधानसभा।
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