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दुराचार का आरोपी दोषमुक्त
अमर उजाला/कोटद्वार।
Updated Fri, 03 Jun 2016 09:30 PM IST
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने कालागढ़ में एक विधवा महिला के साथ दुराचार के मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। पीड़ित महिला ने खुद कोर्ट में बयान दिए कि उसने दुराचार की रिपोर्ट दबाव में दर्ज कराई थी, आरोपी व्यक्ति ने उसके साथ दुराचार नहीं किया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने पीड़िता के साथ राजीनामा कर लिया है, जिसके चलते वह आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं देना चाहती है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनूप खंतवाल ने बताया कि कालागढ़ थाने में एक महिला ने रामगंगा बांध परियोजना में सुरक्षा पद पर कार्यरत अवधेश कुमार के खिलाफ घर में घुसकर दुराचार करने और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था जिस पर थाना पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। एसीजेएम न्यायालय ने मामला सत्र परीक्षणीय पाते हुए गत 29 मार्च, 2016 को सत्र न्यायालय के सुपुर्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 157 भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुुसार सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के कथनों का प्रयोग मात्र किसी साक्षी के बयान की समपुष्टि या खंडन के लिए ही किया जा सकता है। इसलिए मात्र सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के बयानों के आधार पर अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। विशेषकर तब जब पीड़िता ने पुलिस और अन्य लोगों के दबाव में यह बयान पुलिस व मजिस्ट्रेट को दिए जाने कहें हों।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनूप खंतवाल ने बताया कि कालागढ़ थाने में एक महिला ने रामगंगा बांध परियोजना में सुरक्षा पद पर कार्यरत अवधेश कुमार के खिलाफ घर में घुसकर दुराचार करने और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था जिस पर थाना पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। एसीजेएम न्यायालय ने मामला सत्र परीक्षणीय पाते हुए गत 29 मार्च, 2016 को सत्र न्यायालय के सुपुर्द कर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि धारा 157 भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुुसार सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के कथनों का प्रयोग मात्र किसी साक्षी के बयान की समपुष्टि या खंडन के लिए ही किया जा सकता है। इसलिए मात्र सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के बयानों के आधार पर अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। विशेषकर तब जब पीड़िता ने पुलिस और अन्य लोगों के दबाव में यह बयान पुलिस व मजिस्ट्रेट को दिए जाने कहें हों।
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