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पुलिस ने ग्रामीणों को खोह नदी में जाने से रोका, प्रदर्शन
Updated Tue, 24 Apr 2018 10:53 PM IST
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कोटद्वार। खोह नदी में मशीनों द्वारा हो रहे खनन के विरोध में काशीरामपुर तल्ला के ग्रामीणों का आंदोलन नौवें दिन भी जारी रहा। राजेश नौटियाल आमरण अनशन पर रहे। खनन पर लगी मशीनों को हटाने के लिए जा रही महिलाओं को पुलिस ने बलपूर्वक रोका। इस पर उन्होंने प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर आक्रोश व्यक्त किया।
मंगलवार को सुबह काशीरामपुर तल्ला की महिलाएं आमरण अनशन पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों द्वारा पिछले दो दिन से नदी में खनन पर लगी मशीनों और ट्रक को भगाने की घटना के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। इस बीच उस समय माहौल गरमा गया, जब महिलाएं लाठी-डंडों के साथ खनन पर लगी मशीनों को रोकने के लिए नदी की ओर जाने लगीं। पुलिस ने उनको नदी में जाने से रोक दिया। इस बीच पुलिस और ग्रामीणों में तीखी बहस भी हुई, लेकिन पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर महिलाओं को नदी में जाने से जबरन रोक दिया। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने खनन के विरोध में नारेबाजी के साथ क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार पर खनन माफिया के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। कहा कि 60 वर्षों के इतिहास में पहली बार इस प्रकार का खनन किया जा रहा है। खोह नदी में मशीनों से मानकों के विपरीत खनन किया जा रहा है, जिससे आने वाली बरसात में खोह नदी के तट से लगी आबादी का बहना तय है। 15 शीशम के पेड़ उखाड़े जाने के बाद भी खननकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने पूरी तरह से मशीनों को नदी से हटाए जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
इस अवसर पर पर्यावरण चेतना समिति के अध्यक्ष संजय तिवारी, सूरज प्रसाद कांती, पंकज कोटियाल, चंद्रकांत बलोधी, गबर सिंह, सतीश रावत, गौरया देवी, अनुसूया रावत, धूपा देवी, रुकमा देवी, मनोरमा देवी, भगवती देवी, मधु देवी, मीरा देवी, माया देवी, विजेश्वरी देवी, लाजवंती देवी व शांति देेवी आदि मौजूद थे।
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मंगलवार को सुबह काशीरामपुर तल्ला की महिलाएं आमरण अनशन पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों द्वारा पिछले दो दिन से नदी में खनन पर लगी मशीनों और ट्रक को भगाने की घटना के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। इस बीच उस समय माहौल गरमा गया, जब महिलाएं लाठी-डंडों के साथ खनन पर लगी मशीनों को रोकने के लिए नदी की ओर जाने लगीं। पुलिस ने उनको नदी में जाने से रोक दिया। इस बीच पुलिस और ग्रामीणों में तीखी बहस भी हुई, लेकिन पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर महिलाओं को नदी में जाने से जबरन रोक दिया। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने खनन के विरोध में नारेबाजी के साथ क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार पर खनन माफिया के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। कहा कि 60 वर्षों के इतिहास में पहली बार इस प्रकार का खनन किया जा रहा है। खोह नदी में मशीनों से मानकों के विपरीत खनन किया जा रहा है, जिससे आने वाली बरसात में खोह नदी के तट से लगी आबादी का बहना तय है। 15 शीशम के पेड़ उखाड़े जाने के बाद भी खननकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने पूरी तरह से मशीनों को नदी से हटाए जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
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इस अवसर पर पर्यावरण चेतना समिति के अध्यक्ष संजय तिवारी, सूरज प्रसाद कांती, पंकज कोटियाल, चंद्रकांत बलोधी, गबर सिंह, सतीश रावत, गौरया देवी, अनुसूया रावत, धूपा देवी, रुकमा देवी, मनोरमा देवी, भगवती देवी, मधु देवी, मीरा देवी, माया देवी, विजेश्वरी देवी, लाजवंती देवी व शांति देेवी आदि मौजूद थे।
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