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पिता के वचनों के निर्वहन को भगवान राम गए 14 वर्ष का वनवास

Sun, 14 Oct 2018 10:08 PM IST
Updated Sun, 14 Oct 2018 10:08 PM IST
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पिता के वचनों के निर्वहन को भगवान राम गए 14 वर्ष का वनवास
कोटद्वार। मालवीय उद्यान में चल रहे रामलीला मंचन के सातवें दिन शनिवार रात राम वनवास लीला का मंचन किया गया।शनिवार रात रामलीला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत और विशिष्ट अतिथि पूर्व पालिकाध्यक्ष रश्मि राणा ने किया। मुख्य अतिथि डा. हरक सिंह रावत ने लोकतंत्र को राम राज्य का परिचायक बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में बनने का सुंदर समय आ गया है। रामलीला में दर्शाया गया कि भगवान राम माता कैकेयी को दिए वचनों को पूरा करने के लिए वनवास चलने का निर्णय लेते हैं। राम के साथ माता सीता और छोटा अनुज लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास के लिए निकल पड़ते हैं। तमसा नदी पार करने के बाद प्रयाग होते हुए वे श्रृंगवेरपुर पहुंचते हैं। यहां केवट भगवान राम को गंगा पार करवाते हैं। चित्रकूट पहुंचने पर राजा दशरथ की पुत्र वियोग में मौत हो जाती है। यहां भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं और भगवान श्रीराम को वापस लौटने का आग्रह करते हैं। पिता के वचनों को निभाने के वायदे पर भगवान राम के अडिग होने पर भरत उनकी पादुकाएं लेकर वापस लौट जाते हैं। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरीश बहरानी, कार्यकारी अध्यक्ष विवेक अग्रवाल, भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील गोयल, दिनेश वर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन महामंत्री धर्मवीर गुसाईं ने किया।
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लक्ष्मण ने काटी शूर्पणखा की नाक
किशनपुर में भाबर के कलालघाटी में रामलीला मंचन में शूर्पणखा नाक कटने और सीता हरण की प्रस्तुति दी गई। रामलीला में शूर्पणखा भगवान राम और लक्ष्मण पर मोहित हो जाती है और शादी करने का प्रस्ताव रखती है। तब श्रीराम के इशारे पर लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए लंकापति रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनने के लिए कहता है। उस मायावी मृग को पाने के लिए सीता अपनी इच्छा जताती हैं। राम सीता के लिए उस मृग को मारने के लिए जाते हैं। जब काफी देर तक भी राम वापस नहीं आते तो सीता लक्ष्मण को अपने भाई राम को खोजने के लिए भेजती हैं। लक्ष्मण सीता की रक्षा के लिए रेखा खींचकर बाहर न आने के लिए कहते हैं। इसके बाद रावण साधु के वेश में आकर भिक्षा मांगता है। सीता लक्ष्मण रेखा को लांघ जाती है और रावण सीता को उकसा कर उसका हरण कर ले जाता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, रश्मि राणा, प्रमोद नैथानी, अशोक गौड़, सौरभ रावत व अनिल बलूनी मौजूद रहे।
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