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Haridwar News: डिजिटल भारत 2047 से देश छुएगा विकास की नई ऊंचाइयां
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- संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल शिक्षा के प्रभावी उपयोग पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादराबाद। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत विकसित डिजिटल भारत 2047 विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक प्रोफेसर मनीष शर्मा ने कहा कि डिजिटल तकनीक आधुनिक भारत के विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन सेवाओं, नवाचार और तकनीकी कौशल के प्रभावी उपयोग से देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने के साथ ही उनमें नवाचार के प्रति जागरूकता और सामाजिक दायित्वों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है।
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कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक डिजिटल तकनीक का समन्वय देश को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सकारात्मक, रचनात्मक और नैतिक उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादराबाद। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत विकसित डिजिटल भारत 2047 विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक प्रोफेसर मनीष शर्मा ने कहा कि डिजिटल तकनीक आधुनिक भारत के विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन सेवाओं, नवाचार और तकनीकी कौशल के प्रभावी उपयोग से देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने के साथ ही उनमें नवाचार के प्रति जागरूकता और सामाजिक दायित्वों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है।
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कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक डिजिटल तकनीक का समन्वय देश को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सकारात्मक, रचनात्मक और नैतिक उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।