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धर्मनगरी पहुंचे डरे-सहमे प्रथम ने सुनाई यूक्रेन के हालात की कहानी
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद के बीच हरिद्वार के प्रथम उन सौभाग्यशाली मेडिकल के छात्रों में शामिल हैं, जो पहले ही अपनों के बीच पहुंच गए। 18 फरवरी को घर पहुंच चुके प्रथम झांब ने अमर उजाला के साथ वहां के हालात साझा किए।
ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की नया हरिद्वार कालोनी निवासी दवा कारोबारी अनिल झांब के बड़े बेटे प्रथम झांब ने 11 दिसंबर 2021 को यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित बोगो मोलेट मेडिकल यूनीवर्सिटी में प्रवेश लिया था। प्रथम झांब तब से वहां पढ़ाई कर रहे थे। रूस और यूक्रेन के बीच उपजे संकट ने उन्हें घर लौटने पर विवश कर दिया। उन्होंने बताया कि वहां के हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थे। यह पता नहीं रहता था कि कब क्या हो जाए। वहां सभी लोग डरे हुए थे। 15 दिन से वह भी आवास से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। पास में ही स्थित स्टोर से 10 मिनट के भीतर खाने का सामान ले आते थे। शहरों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था। प्रथम के पिता अनिल झांब ने बताया कि युद्ध को लेकर उनके मन में अजीबोगरीब ख्याल आ रहे थे। बेटे के वापस आने से राहत मिली है। संवाद
खाद्य सामग्री कीमतें बढ़ गई थी
उन्होंने बताया कि यूक्रेन में खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ गई थी। फ्लाइट के टिकट भी महंगे हो गए थे। यूक्रेन से भारत का टिकट सामान्य रूप से भारतीय मुद्रा में 30 हजार रुपये था, लेकिन उन्हें 60 हजार रुपये में टिकट मिला है। वह भी डायरेक्टर फ्लाइट नहीं थी।
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शम्मी भी लौटे अपनों के बीच
पिरान कलियर निवासी शम्मी खान पिछले पांच सालों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन के हालातों के बाद शम्मी भी अपनों के बीच कलियर पहुंच चुके हैं। हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी शम्मी खान के जीजा शिरान ने बताया कि शम्मी का इस वर्ष पढ़ाई का आखिरी साल है।
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ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की नया हरिद्वार कालोनी निवासी दवा कारोबारी अनिल झांब के बड़े बेटे प्रथम झांब ने 11 दिसंबर 2021 को यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित बोगो मोलेट मेडिकल यूनीवर्सिटी में प्रवेश लिया था। प्रथम झांब तब से वहां पढ़ाई कर रहे थे। रूस और यूक्रेन के बीच उपजे संकट ने उन्हें घर लौटने पर विवश कर दिया। उन्होंने बताया कि वहां के हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थे। यह पता नहीं रहता था कि कब क्या हो जाए। वहां सभी लोग डरे हुए थे। 15 दिन से वह भी आवास से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। पास में ही स्थित स्टोर से 10 मिनट के भीतर खाने का सामान ले आते थे। शहरों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था। प्रथम के पिता अनिल झांब ने बताया कि युद्ध को लेकर उनके मन में अजीबोगरीब ख्याल आ रहे थे। बेटे के वापस आने से राहत मिली है। संवाद
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खाद्य सामग्री कीमतें बढ़ गई थी
उन्होंने बताया कि यूक्रेन में खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ गई थी। फ्लाइट के टिकट भी महंगे हो गए थे। यूक्रेन से भारत का टिकट सामान्य रूप से भारतीय मुद्रा में 30 हजार रुपये था, लेकिन उन्हें 60 हजार रुपये में टिकट मिला है। वह भी डायरेक्टर फ्लाइट नहीं थी।
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शम्मी भी लौटे अपनों के बीच
पिरान कलियर निवासी शम्मी खान पिछले पांच सालों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन के हालातों के बाद शम्मी भी अपनों के बीच कलियर पहुंच चुके हैं। हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी शम्मी खान के जीजा शिरान ने बताया कि शम्मी का इस वर्ष पढ़ाई का आखिरी साल है।