{"_id":"58b1b57a4f1c1b2b69b2782c","slug":"this-plant-will-provide-relief-from-ailments-pandya","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमारियों से निजात दिलाएगा यह संयंत्र : पंड्या ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमारियों से निजात दिलाएगा यह संयंत्र : पंड्या
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 25 Feb 2017 10:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शांतिकुंज के प्रमुख डॉ.प्रणव पंड्या और अधिष्ठात्री शैलदीदी ने शांतिकुंज में उत्तराखंड का पहला प्राकृतिक जल शोधक संयंत्र का शुभारंभ किया। इस संयंत्र की क्षमता प्रति घंटे पचास हजार लीटर पानी स्वच्छ करने की है।
इस अवसर पर डा. पंड्या ने कहा कि हरिद्वार के पानी में आयरन और सिल्ट की मात्रा अधिक रहती है, जिससे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। इससे निजात पाने के लिए शांतिकुंज ने प्राकृतिक जल शोधक संयंत्र का निर्माण कराया है। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र द्वारा पानी में घुले हुए आयरन, सिल्ट और पानी के रंग को साफ किया जाता है। शैल दीदी ने कहा कि यह संयंत्र पूरी तरह प्राकृतिक है जिससे पानी के सभी तत्व मौजूद रहते हैं।
विभाग के इंजीनियर जयसिंह यादव ने बताया कि संयंत्र में पानी के आयरन और सिल्ट को एरिएटर के द्वारा हवा व धूप से ज्यादा से ज्यादा संपर्क कराकर उसके आयरन तत्व को कम किया जाता है फिर फिटकरी और ब्लिचिंग को मिलाकर इसमें घुले हुए सिल्ट को फ्लोकुलेटर के द्वारा फ्लोक्स बनाकर आगे क्लियरिफायर के द्वारा शोधन किया जाता है। इसके पश्चात प्राकृतिक पद्धति से आयरन और सिल्ट को कम करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए फिल्टर से उसे छाना जाता है जिसमें पानी को बालू, रेत बजरी, ग्रेवल, पेवल, बोल्डर की कुल दस परतों के रेपिट ग्रेविटी फिल्टर के माध्यम से छानकर पानी को टंकी में एकत्र किया जाता है।
इस अवसर पर डा. पंड्या ने कहा कि हरिद्वार के पानी में आयरन और सिल्ट की मात्रा अधिक रहती है, जिससे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। इससे निजात पाने के लिए शांतिकुंज ने प्राकृतिक जल शोधक संयंत्र का निर्माण कराया है। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र द्वारा पानी में घुले हुए आयरन, सिल्ट और पानी के रंग को साफ किया जाता है। शैल दीदी ने कहा कि यह संयंत्र पूरी तरह प्राकृतिक है जिससे पानी के सभी तत्व मौजूद रहते हैं।
विज्ञापन
विभाग के इंजीनियर जयसिंह यादव ने बताया कि संयंत्र में पानी के आयरन और सिल्ट को एरिएटर के द्वारा हवा व धूप से ज्यादा से ज्यादा संपर्क कराकर उसके आयरन तत्व को कम किया जाता है फिर फिटकरी और ब्लिचिंग को मिलाकर इसमें घुले हुए सिल्ट को फ्लोकुलेटर के द्वारा फ्लोक्स बनाकर आगे क्लियरिफायर के द्वारा शोधन किया जाता है। इसके पश्चात प्राकृतिक पद्धति से आयरन और सिल्ट को कम करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए फिल्टर से उसे छाना जाता है जिसमें पानी को बालू, रेत बजरी, ग्रेवल, पेवल, बोल्डर की कुल दस परतों के रेपिट ग्रेविटी फिल्टर के माध्यम से छानकर पानी को टंकी में एकत्र किया जाता है।
विज्ञापन