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...तो थाने-कोतवाली में सड़ेंगे पुराने नोट
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Tue, 27 Dec 2016 11:03 PM IST
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पिरान कलियर दरगाह के साढ़े छह लाख रुपये चार दिन बाद रद्दी हो जाएंगे। दरअसल दान की गिनती के दौरान विवाद होने पर दरगाह की दो गोलक पिछले आठ साल से ट्रेजरी में रखी हुई हैं। 31 दिसंबर के बाद एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों का चलन बंद होने पर दरगाह के साढ़े छह लाख रुपयों की कीमत कागज के टुकड़ों के बराबर हो जाएगी। वक्फ बोर्ड से लेकर प्रशासन के रूप में दरगाह प्रबंधन से जुड़े सरकार के नुमाइंदों और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
वर्ष 2007 में दरगाह की गोलकों की गिनती के दौरान नोटों की गड्डी बनाने को लेकर विवाद हो गया था। तत्कालीन दरगाह मैनेजर तहसीन खां की ओर से सिविल लाइंस कोतवाली में एक दर्जन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जांच अधिकारी निर्विकार सिंह ने जनवरी 2008 में गोलक नंबर चार और गोलक नंबर 21 को कब्जे में लेकर रुड़की ट्रेजरी में जमा करा दिया था।
जांच में आरोप साबित न होने पर मुकदमा बंद कर दिया गया। तब से दोनों गोलक ट्रेजरी में रखी हुई हैं। इनमें अधिकांश नोट पांच सौ और एक हजार के हैं। दोनों गोलकों में करीब साढ़े छह लाख रुपये मौजूद होने का उल्लेख खुद पुलिस ने अपनी जांच में किया है। अब 31 दिसंबर के बाद एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने पर दरगाह की यह दान की रकम रद्दी बन जाएगी। इस मामले से सरकार के उन नुमाइंदों और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो बीते आठ सालों से वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, सीईओ या दरगाह मैनेजर रहे हैं।
वर्ष 2007 में दरगाह की गोलकों की गिनती के दौरान नोटों की गड्डी बनाने को लेकर विवाद हो गया था। तत्कालीन दरगाह मैनेजर तहसीन खां की ओर से सिविल लाइंस कोतवाली में एक दर्जन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जांच अधिकारी निर्विकार सिंह ने जनवरी 2008 में गोलक नंबर चार और गोलक नंबर 21 को कब्जे में लेकर रुड़की ट्रेजरी में जमा करा दिया था।
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जांच में आरोप साबित न होने पर मुकदमा बंद कर दिया गया। तब से दोनों गोलक ट्रेजरी में रखी हुई हैं। इनमें अधिकांश नोट पांच सौ और एक हजार के हैं। दोनों गोलकों में करीब साढ़े छह लाख रुपये मौजूद होने का उल्लेख खुद पुलिस ने अपनी जांच में किया है। अब 31 दिसंबर के बाद एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने पर दरगाह की यह दान की रकम रद्दी बन जाएगी। इस मामले से सरकार के उन नुमाइंदों और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो बीते आठ सालों से वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, सीईओ या दरगाह मैनेजर रहे हैं।
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