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संस्कृत अकादमी अपने उद्देश्यों से न भटके: वशिष्ठ

Wed, 01 Sep 2021 12:38 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 12:38 AM IST
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Sri Ganga Sabha came out in protest against the liberation plan
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना का श्रीगंगा सभा व ब्राह्मण समाज ने विरोध शुरू कर दिया है। श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्कृत अकादमी अपने मूल उद्देश्यों से भटक रही है। वहीं ब्राह्मण समाज के लोगों का कहना है कि सालों से लोग सनातन धर्म के अनुसार अपने पूर्वजों का अस्थि विसर्जन का कार्य हरकी पौड़ी पर अपने तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में कराते आ रहे हैं।
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना का धर्मनगरी में विरोध शुरू हो गया है। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि हजारों वर्षों से हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों और यजमानों का संबंध चला आ रहा है। यजमान अपने परिजनों के अस्थि प्रवाह के लिए तीर्थ पुरोहितों से सीधा संपर्क करते हैं। इसमें किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं है। यह कार्य आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। इसके लिए पुरोहितों ने कोई शुल्क निर्धारित नही किया हुआ है।
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संस्कृत अकादमी अपने मूल उद्देश्यों से भटककर अस्थि प्रवाह जैसे धार्मिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है और इसे व्यवसाय का रूप देने की कोशिश कर रही है। उनकी इस योजना का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम पुरोहितों का परंपरागत अधिकार है, इसमें किसी अन्य का हस्तक्षेप बरदाश्त नहीं किया जाएगा। अच्छा हो कि संस्कृत अकादमी संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार और संस्कृत विद्यालयों की व्यवस्था पर ध्यान दे।
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अखंड ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ पंडित आदित्य झा ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी को अस्थि विसर्जन कार्य का व्यवसायीकरण नही करने दिया जाएगा। यह तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों का हनन है।
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ये मुक्ति योजना
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से मुक्ति योजना से देश-विदेश के लोगों को हरकी पैड़ी पर घर बैठे अस्थि विसर्जन करने की सुविधा प्रदान करने की है। योजना के तहत गंगा घाट पर होने वाले अस्थि विसर्जन को भी परिजन लाइव देख भी सकेंगे। परिजनों को अस्थियों को हरिद्वार स्थित अकादमी के कार्यालय पर कोरियर के माध्यम से भेजना होगा। इसके बाद अकादमी पंडों से अस्थियों का विसर्जन कराएगी। विदेशों में रह रहे प्रवासियों के लिए संस्कार शुल्क सौ डॉलर रखा गया है। हालांकि, अभी देश के लिए शुल्क निर्धारित नहीं किया गया।

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योजना को लागू करने में समय लगेगा, लेकिन अकादमी मुक्ति योजना को व्यवसाय नहीं। लोगों की आस्था से जोड़ते हुए अपनों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कराने में सहयोग करना चाह रही है। उनसे लिया जाने वाला संस्कार शुल्क भी पुरोहितों और अन्य कार्यों में खर्च किया जाएगा। इसमें अकादमी अपने पास कोई पैसा नहीं रखेगी।
- डॉ. आनंद भारद्वाज, सचिव, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी
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