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अंधेरगर्दी की भेंट चढ़ी शहर को रोशन करने की योजना
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:57 PM IST
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हरिद्वार। शहर को जगमग करने वाली 60 करोड़ रुपये की आरएडीआरपी योजना ऊर्जा निगम की अंधेरगर्दी की भेंट चढ़ गई है। अधिकारियों की सुस्ती का आलम यह है कि चार वर्ष में यह 40 करोड़ रुपये खर्च कर भी शहर में बिजली की व्यवस्था सुचारु नहीं कर पाया है। 540 ट्रांसफार्मरों में से ऊर्जा निगम अभी तक केवल 140 ट्रांसफार्मर लगा पाया है। लेकिन कनेक्शन न दिए जाने से यह ट्रांसफार्मर भी शोपीस बने हुए हैं।
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शहर में ओवर लोड से होने वाली ट्रिपिंग, बिजली चोरी सहित बिजली से संबंधित तमाम समस्याएं दूर करने के लिए वर्ष 2012 में केंद्र सरकार की आरएडीआरपी (रीडस्टेक्चर एक्सीलरेटेट डेवलपमेंट एंड रिफार्म प्रोग्राम पावर प्लान) योजना शुरू हुई थी। इसके लिए ऊर्जा निगम ने एक वर्ष तक सर्वे भी किया था। जनवरी 2013 में योजना के तहत केंद्र सरकार ने बिजली की जरूरतों को देखते हुए तार, ट्रांसफार्मर, एमसीबी, तीन बड़े बिजली घर सहित कई उपकरणों को बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। वर्ष 2014 तक काम समाप्त कर योजना के तहत शहर जगमग होना था। ऊर्जा निगम ने समय से पहले काम पूरा करने के वादे भी किए थे लेकिन सब हवाई साबित हुए। इस योजना का काम अब तक अटका हुआ है। अधिकारियों की सुस्ती का आलम यह है कि 60 करोड़ रुपये की यह योजना कागजों में सिमटी हुई है। 40 करोड़ फूंकने के बाद भी 540 ट्रांसफार्मर नहीं लग पाए। मात्र 270 एबी कंडक्टर अब तक बदले जा सके हैं। 60 करोड़ रुपये की योजना परवान न चढ़ने से शहर में लगातार कटौती की समस्या बनी हुई है। ऊर्जा निगम योजना को गंभीरता से लेता तो शहर की तस्वीर अलग होती।
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इन इलाकों को मिलना था लाभ
इस योजना में 100 केवि के 510 और 60 केवि के 30 ट्रांसफार्मर ज्वालापुर, सुभाषनगर, मोहल्ला चौहानान, धीरवाली, आर्य नगर, विवेक बिहार, ऋषिकुल, देवपूरा, रेलवे स्टेेशन, अपर रोड, भीमगोड़ा, खड़खड़ी, दुर्गानगर, मुख्य गली, सप्तऋषि आदि क्षेत्र में लगाए जाने थे।
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तीन बिजलीघरों में से केवल एक बना
योजना के तहत तीन बड़े बिजली घर बनाए जाने थे। लेकिन अभी तक एक बिजली घर बन पाया है। यह बिजली घर भेल सेक्टर 2 में बनाया गया है। 33/11 केवि का यह बिजली घर भेल, ज्वालापुर, सुभाषनगर सहित कई क्षेत्रों को बिजली देने के काम आ रहा है। इसकी क्षमता 2 गुना 8 एमवीए है। लेकिन दो और बिजली घर के लिए निगम अभी तक जगह तन नहीं तलाश पाया है।
20 करोड़ रुपये में कैसे होगा शेष काम
ऊर्जा निगम ने अभी तक 40 करोड़ रुपये 270 किलोमीटर लंबी तार बदलने, 140 ट्रांसफार्मर लगाने और अन्य छोटे कार्यों में फूंक दिए हैं। जबकि अभी शहर में 400 ट्रांसफार्मर लगने बाकि हैं। लेकिन हालत यह है कि इतनी राशि खर्च करने के बाद भी अभी तक एक ट्रांसफार्मर नहीं चल पाया है। अब सवाल उठ रहे हैं शेष 20 करोड़ में 400 ट्रांसफार्मर कैसे लग पाएंगे। इसका जवाब अधिकारी भी नहीं दे पा रहे हैं।
जयपुर की कंपनी ने नहीं दिया सामान
परियोजना चलाने वाले अधिकारियों की मानें तो इस काम में जयपुर की कंपनी की लापरवाही है। उन्होंने कभी भी समय पर जरूरी उपकरणों को नहीं दिया। कभी स्थानीय प्रतिनिधियों ने इसका विरोध किया तो कहीं पर गलियां तंग होने के कारण इनको नहीं लगाया जा सका।
आरएपीडीआरपी के तहत वर्ष 2014 में कार्य पूरा करवाना था। लेकिन किन्हीं कारणों से कार्य पूरा नहीं किया गया। 540 ट्रांसफार्मरों को लगाने का कार्य होना था। अब तक 140 ट्रांसफार्मर लगा दिए गए हैं। जल्द इनको सप्लाई दी जाएगी। आगामी दिनों में युद्ध स्तर से कार्य किया जाएगा। तीन महीनों में समस्त कार्यों को पूरा कर दिया जाएगा।
देवेंद्र जोशी, परियोजना खंड अधिकारी, हरिद्वार