फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Notbandi two months: from relief problem somewhere else

नोटबंदी के दो माह: कहीं राहत, कहीं दिक्कत बाकी

Mon, 09 Jan 2017 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Mon, 09 Jan 2017 10:54 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
नोटबंदी को पूरे दो महीने का समय बीत चुका है। शुरूआत में हर तबके ने नोटबंदी से परेशानी झेली। फिलहाल कहीं राहत तो कहीं दिक्कत बरकरार है। कैश की किल्लत जैसे जैसे दूर हो रही है, बाजार में कारोबार भी वैसे वैसे पटरी पर आ रहा है। वहीं निजी कंपनियों के कर्मचारी अभी भी परेशान हालत में हैं। उन्हें अपनी तनख्वाह निकालने के लिए भी साप्ताहिक छुट्टी दांव पर लगानी पड़ रही है। हालांकि किसान और मजदूर वर्ग की स्थिति में हल्का सुधार आया है।
===========
- हाल ए बाजार
ज्वालापुर में दो माह से जार जार हो रहे बाजार में अब रौनक लौटने लगी है। मुख्य बाजार कटहरा, गुरुद्वारा रोड, मेन बाजार, रेलवे रोड पर व्यापारी कुछ राहत तो महसूस कर रहे हैं। लेकिन उनका है कि कुल कारोबार घटकर आधे से भी कम रह गया है। नोटबंदी के पहले हफ्ते कारोबार घटकर 10 प्रतिशत तक रह गया था। यह स्थिति महीने भर बनी रही। लेकिन मध्य दिसंबर के बाद से हालात सुधरे हैं। अधिकतर लोग डेबिट कार्ड का प्रयोग कर खरीदारी कर रहे हैं। जिससे अब कारोबार औसतन 40 से 50 फीसदी तक पहुंच रहा है।
विज्ञापन



कारोबार मेें पिछले महीने के मुकाबले कुछ सुधार जरूर आया है। लेकिन गर्म कपड़ों का सीजन होने के बावजूद कारोबार लगभग आधा है। कैश की किल्लत खत्म हो तो सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- पंकज चावला, रेडिमेड गारमेंटस कारोबारी, ज्वालापुर

दवाइयों जैसी जरूरत की चीजें तो लोग खरीद रहे हैं, लेकिन सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री आधे से भी कम रह गई है। कैश की कमी के चलते लोग कम खर्च कर रहे हैं।
- राजेश कुमार खत्री, दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन कारोबारी, हरिद्वार

नोटबंदी के पहले हफ्ते में बाजार में भारी गिरावट आ गई थी, लेकिन अब दिन प्रतिदिन हालात सुधर रहे हैं। करीब 50 प्रतिशत लोग स्वैप मशीन का प्रयोग भी करने लगे हैं, जल्द और सुधार की उम्मीद है।

बाजार में अब स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है। इतना जरूर है कि लोग सिर्फ जरूरत की चीजों पर पैसा खर्च कर रहे हैं। इससे फिजूलखर्ची रुकी है और कारोबार में बाजार से रुका बकाया भी वापस आया है।

- अजय चतुर्वेदी, किराना सामान के थोक कारोबारी, हरिद्वार

सब्जी में हालात खराब, गल्ला मंडी में सुधार
नोटबंदी के दो माह गुजरने के बाद भी सब्जी मंडी की हालत खस्ता है। डिमांड कम होने के चलते सब्जी खराब होने से कारोबारियों को रोजाना नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं गल्ला मंडी में अनाज, चावल व दालों के व्यापारियों को कुछ राहत है। ज्वालापुर सब्जी मंडी में आढ़ती जोगेंद्र माटा, शौकीन अंसारी, राजू सहगल, बिट्टू, संतोष कुमार आदि ने बताया कि मांग कम होने पर सब्जी खराब हो रही है। छोटे व्यापारी मंदी का हवाला देकर बकाया भी नहीं चुका रहे हैं। वहीं गल्ला मंडी कारोबारी त्रिलोक चंद का कहना है कि कारोबार में धीरे धीरे सुधार आ रहा है। मंडी समिति उपाध्यक्ष अरशद ख्वाजा ने बताया कि सब्जी खराब होने से मंडी आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि गल्ला कारोबारियों को सामान खराब होने की चिंता से नहीं जूझना पड़ता। कुल मिलाकर मंडी का कारोबार 40 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed