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जटिल समस्याओं का अंतर्विषयक ज्ञान से समाधान : गुप्ता
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फोटो
- गुरुकुल कांगड़ी में मनोविज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 260 प्रतिभागी शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने मनोविज्ञान को शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और सामाजिक विज्ञान से जोड़कर समझने पर जोर दिया।
संगोष्ठी में मानवीय उत्कर्ष और समग्र कल्याण के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण पर चर्चा हुई। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक नवीन गुप्ता ने कहा कि जटिल मानवीय समस्याओं के लिए एक विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विभिन्न विषयों के ज्ञान को जोड़कर प्रभावी समाधान विकसित करने की बात कही।
कुलसचिव सत्यदेव निगमलांकर ने बताया कि मनोविज्ञान की भूमिका अब मानसिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास से है। आइक्यूएसी निदेशक पंकज मदान ने विद्यार्थियों के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण को जरूरी बताया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को मानवीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया। संगोष्ठी का विषय सीमाओं से परे मनोविज्ञान : मानवीय उत्कर्ष और कल्याण के लिए अंतर्विषयक मार्ग था।
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आरडीसी के अध्यक्ष सुहास ने अंतर्विषयक शोध को प्रोत्साहित करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराने को आरडीसी की जिम्मेदारी बताया। ऐसे अकादमिक मंच शोध की नई दिशाओं और सहयोग की संभावनाओं को सामने लाते हैं। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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- गुरुकुल कांगड़ी में मनोविज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 260 प्रतिभागी शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने मनोविज्ञान को शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और सामाजिक विज्ञान से जोड़कर समझने पर जोर दिया।
संगोष्ठी में मानवीय उत्कर्ष और समग्र कल्याण के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण पर चर्चा हुई। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक नवीन गुप्ता ने कहा कि जटिल मानवीय समस्याओं के लिए एक विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विभिन्न विषयों के ज्ञान को जोड़कर प्रभावी समाधान विकसित करने की बात कही।
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कुलसचिव सत्यदेव निगमलांकर ने बताया कि मनोविज्ञान की भूमिका अब मानसिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास से है। आइक्यूएसी निदेशक पंकज मदान ने विद्यार्थियों के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण को जरूरी बताया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को मानवीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया। संगोष्ठी का विषय सीमाओं से परे मनोविज्ञान : मानवीय उत्कर्ष और कल्याण के लिए अंतर्विषयक मार्ग था।
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आरडीसी के अध्यक्ष सुहास ने अंतर्विषयक शोध को प्रोत्साहित करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराने को आरडीसी की जिम्मेदारी बताया। ऐसे अकादमिक मंच शोध की नई दिशाओं और सहयोग की संभावनाओं को सामने लाते हैं। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।