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श्रीमद्भागवत का प्रसाद पिया जाता है : आचार्य राजेश

Mon, 19 Feb 2024 01:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 19 Feb 2024 01:15 AM IST
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Katha Vyas described the Srimad Bhagwat Katha
Iभागवत का महात्म्य और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की लीला का दूसरे किया वर्णनI
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शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और इसके महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा रूपी प्रसाद को ग्रहण करने की अवधारणा है कि इसे पीया जाता है।

कथा व्यास आचार्य राजेश ने एक प्रसंग सुनाया, कहा कि एक मूर्तिकार ने दो मूर्ति बनाई। इसमें एक की कीमत सौ रुपये दूसरे की एक लाख रखी। जब भी लोग आते और मूर्ति में समानता देखते, लेकिन उसकी कीमत में भिन्नता तो उनके मन में तमाम प्रश्न उठते। इसी बीच एक साधु आए और उन्होंने एक मूर्ति के कान में डोरी डाला और दूसरी तरफ से निकाल दिया। दूसरी में डाला तो वह पेट में चला गया। इसी मूर्ति की कीमत एक लाख रुपये थी। जिसके कान में इधर से उधर डोरी निकल गई वह कम कीमत का था और जो पेट में लेकर गया वह कीमती था। इसका भावार्थ यह है कि कान से सुनकर कथा को निकाल देना कोई प्रतिफल नहीं देता, लेकिन अगर उसे पीया जाए तो वह प्रसाद जीवन में लाभकारी होता है।
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Iपथ भ्रष्ट को भी क्षमा करते हैं वासुदेवI
कथा व्यास आचार्य राजेश ने महाभारत के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि दुर्योधन ने जब छल से पांडवों को मारने का कुचक्र रचा तो भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन समेत सभी पांडवों के स्थान को परिवर्तित कर दिया। अश्वत्थामा आए और उनके पांचों पुत्रों को काट दिया। इस पर धर्मयुद्ध के विपरीत कार्य कर रहा दुर्योधन भी बिलख पड़ा और उसने कहा कि कुल का ही नाश कर दिया। द्रोपदी विलाप करने लगी। लेकिन अर्जुन का वह पराक्रम जो भगवत वत्सल भगवान श्रीकृष्ण के प्रभाव से था। उन्होंने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर द्रोपदी के चरणों में लाकर रख दिया। पुत्र वियोग में तड़पती द्रोपदी ने ब्राह्मण कुमार को क्षमा किया। वहीं भगवान वासुदेव ने भी क्षमा कर दिया। यही उनकी विशेषता है और यही उनकी भक्ति है।
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